यौमे आशूरा पर पूरा बनारस ...या हुसैन अलविदा के नारों से गूंज उठा। कांधे पर ताजिया लिए अकीदतमंदों का हुजूम करबला की ओर से रवां था। ‘आई जेहरा की सदा, या हुसैन अलविदा...’ नौहों के इन बोल से साथ मातम पुर्सी करते हुए इमाम हुसैन के चाहने वालों का शहर भर में हुजूम उमड़ा रहा। इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश करने का जज्बा इतना बुलंद था कि लोगों ने खंजर और कमा का मातम कर खुद को लहूलुहान तक कर लिया। इसमें बड़े, बुजुर्ग ही नहीं बच्चे भी शामिल रहे। ये मंजर देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....
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- फोटो : amar ujala
मुहर्रम पर शुक्रवार को बनारस के अलग-अलग इलाकों से ताजियों का जुलूस उठाया गया जो कि दरगाह-ए-फातमान, सदर इमामबाड़ा लाट और शिवाला घाट पर ठंडा किया गया। ताजियों के आगे आगे नौजवान फन-ए-सिपहगिरी का खेल करते हुए चल रहे थे जिसे देख लोग दंग थे। तलवार, लाठी, पटका का हैरतअंगेज कारनामा दिखाते हुए लोग चल रहे थे। एक से बढ़कर एक ताजियों की जियारत करने को और उसे छूकर मन्नत मांगने वालों का हुजूम रास्ते भर उमड़ा रहा। करबला वालों को खिराजे अकीदत पेश करने के लिए ख्वातीन की भी पूरी हिस्सेदारी रही।
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- फोटो : अमर उजाला
ताजियों के जुलूस के साथ अलम, दुलदुल और ताबूत के भी जुलूस उठाए गए। दालमंडी ने करीब तीन सौ साल पुराना अलम, दुलदुल और ताबूत का जुलूस उठाया गया। जुलूस जब नई सड़क चौराहे पर पहुंचा तो यहां बच्चे, बुजुर्ग और नौजवानों ने खंजर, कमा और जंजीर का मातम किया। मदनपुरा, गौरीगंज और शिवपुर में भी जंजीर और कमा का मातम हुआ। शहर भर की 30 शिया अंजुमनों ने अलग अलग जगहों से जुलूस निकाला।
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- फोटो : अमर उजाला
ताजियों का जुलूस अर्दली बाजार, कचहरी, नदेसर, चौक, दालमंडी, नई सड़क, हड़हा सराय, लल्लापुरा, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, बजरडीहा, शिवाला, मंडुवाडीह आदि क्षेत्रों से निकला जो कि फातमान दरगाह में ले जाकर ठंडे किए गए। कई ताजिये सदर इमामबाड़ा लाट पर दफन किए गए।
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- फोटो : अमर उजाला
लोहता से भी करीब पचास से अधिक ताजियों का जुलूस निकला जो कि भट्टी गांव में करबला पर ठंडे किए गए। जुलूस में गंगा-जमुनी तहजीब दिखी। कई संगठनों की ओर से मातम करने वालों के लिए सबील लगाए गए थे। उधर, यौमे आशूरा के दिन घरों में भी इमाम का मातम मनाया गया। दोपहर बाद खिचड़े पर इमाम हुसैन के नाम से नज्र कराई गई।
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- फोटो : अमर उजाला
करबला में ताजिये ठंडे करने के बाद शुक्रवार को शहर के सभी इमामबाड़ों व घरों में शाम-ए-गरीबां की मजलिसें हुईं। मजलिसों में इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत के बाद के वाकियात बयान किए गए। करबला के 72 साथियों को शहीद करने के बाद यजीदियों ने इमाम हुसैन के घरवालों पर जुल्म ढाए, मजलिस में उसकी दर्द भरी दास्तां सुनकर लोगों की आंखें छलक पड़ीं।
मजलिस को खिताब करते हुए उलेमा ने बताया कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिवार वालों को लूट लिया गया। उनके खेमे जला दिए गए। औरतों के साथ बदसलूकी की गई। बच्चों पर जुल्म किया गया। उन्हें कैद कर कूफा ले जाया गया। मजलिस में ये दास्तां सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं थीं।