मोक्षपुरी में भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति, समर्पण और मिलन के रंग रविवार को आस्था के भावों पर अमिट हो गए। भोर में नंदीघोष नामक फूलों, लतरों से सुसज्जित रथ पर भगवान जगन्नाथ के आरूढ़ होने के साथ ही प्रभु के प्रेम की चासनी पगने लगी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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- फोटो : अमर उजाला
रथ का पहिया पांच कदम खींचा गया और फिर तुलसी अर्पण के लिए घर-घर से लोग निकल पड़े। काशी में भगवान के दर्शन का अनूठा लक्खा मेला भक्ति भाव के ऊंचे मानकों पर गुलजार हो गया।
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- फोटो : अमर उजाला
सुबह इस्कॉन के भजनानंदियों के साथ संन्यासियों संग श्रद्धालु थिरके तो शाम को करीब दो किमी दायरे में बनारस की मस्ती, मिजाज और रंगों की ऐसी छटा बिखरी कि हर कोई उस आनंद में गोता लगाकर धन्य हो उठा।
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- फोटो : अमर उजाला
ससुराल में सैर-सपाटे पर भगवान के निकलने की तैयारियां भी शानो-शौकत के साथ हुईं। पुजारी राधेश्याम पांडेय के आचार्यत्व में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को पीतांबर पहनाकर पीले गेंदा के फूलों से शृंगार किया गया। रथ के शिखर के अलावा परिक्रमा पथ को भी भव्य सजाया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
5:11 बजे भोर में मंगला आरती हुई और फिर पट खुलते ही कतारबद्ध बच्चे, महिलाएं और पुरुष तुलसी दल अर्पित करने और रथ के पहियों के स्पर्श के लिए उमड़ने लगे।
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- फोटो : अमर उजाला
बेला के फूलों की लड़ियों के अलावा दशहरी, लंगड़ा आम और मेवा की नान खटाई भगवान को चढ़ाकर सुख -समृद्धि की कामना की जाने लगी। शाम को बेनीराम बाग के सामने जहां रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ थे, वहां से लेकर रथयात्रा चौराहे तक तिल रखे की जगह नहीं थी। गुलाब, बेला के फूलों की छतरियां दूर से ही लतर की रोशनी में जगमगा रही थीं।
ससुराल में पहला भोग
-परवल की मिठाई, केशरिया पेड़ा, राजभोग, बनारसी लंगड़ा आम और नान खटाई का लगा भगवान को भोग
-नाश्ते में छौंका मूंग-चना, पेड़ा, गुड़, दही -खांड़सारी के साथ शर्बत
-भोजन:पूरी, कोड़हे की मसाला रहित सब्जी, दही, कटहल, आम के अचार की थाली
-रात 12 बजे आरती के बाद पट बंद
26 जून की सुबह 5:11 बजे मंगला आरती के साथ रथ पर खुलेंगे भगवान के पट