गर्मी की छुट्टियां खत्म हुईं और स्कूलों में पसरा सन्नाटा सोमवार को टूट गया। बनारस सहित पूर्वांचल में भी ग्रीष्मावकाश के बाद दो जुलाई से परिषदीय विद्यालयों के साथ माध्यमिक स्कूल खुल गए। स्कूल खुल जाने से सड़कों से लेकर स्कूल तक का नजारा बदल गया। स्कूल पहुंचे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान नजर आई तो कुछ बच्चे स्कूल ना जाने को लेकर रोए भी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
लंबी छुट्टियों के बाद अपने दोस्तों से मिलकर बच्चों के चेहरे खिल गए। पहला दिन पढ़ाई कम और मस्ती के साथ ज्यादा गुजरा। उधर स्कूल खुलने से सुबह जहां सड़कों पर चहल पहल बढ़ गई। वहीं छुट्टी के समय शहर में जाम का झाम भी झेलना पड़ा।
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ग्रीष्मावकाश के बाद सोमवार से खुले कई परिषदीय विद्यालयों में पहले दिन यूनिफार्म बांटा गया। यूनिफार्म पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे थे। उधर कुछ स्कूलों की शुरूआत प्रार्थना से हुई। करीब डेढ़ महीने की छुट्टी के बाद दोस्त मिले। किसी ने हाथ मिलाया तो कोई गले मिला। एक-दूसरे से ढेर सारी बातें की।
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शिक्षकों ने भी बच्चों से छुट्टियों के अनुभव जाने। कुछ कक्षाओं में अप्रैल में पढ़ाए गए सिलेबस का रिवीजन कराया गया। उधर परिषदीय विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान की पोल खुल गई। यहां शिक्षक तो दिखे लेकिन स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम रही।
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पूर्व माध्यमिक स्कूल कबीचौरा में कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या महज 10-12 तो कहीं पर 25-30 बच्चों ने उपस्थित दर्ज कराई। ज्यादातर स्कूलों में चारों ओर अव्यवस्थाएं दिखाई दीं। मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहा। गंदगी फैली रही। नल खराब पड़े होने से शुद्ध पानी पीने को नहीं मिला। शौचालयों की स्थिति भी खराब दिखी।
उधर कई स्कूलों में यूनिफार्म, किताब और बैग का वितरण भी किया गया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय मंगारी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुआरी कलां हरहुआ, पूर्व माध्यमिक विद्यालय उदयपुर, प्राथमिक विद्यालय गोसाईपुर में यूनिफार्म बांटा गया। उधर कई स्कूलों में नया प्रयोग भी देखने को मिला। प्राथमिक विद्यालय रग्धुबीर में बच्चों को कार्टून फिल्म दिखाई गई।