Varanasi News: काशी के गायन से लेकर शहनाई और दुक्कड़ व वायलिन सहित पांच विधा के आठ कलाकारों को संगीत नाटक सम्मान मिला। इसमें घराने के प्रख्यात कलाकार पं. राजन-साजन मिश्र की अगली पीढ़ी भी शामिल है।
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काशी के गायन से शहनाई, दुक्कड़ व वायलिन सहित पांच विधा के आठ कलाकारों के सिर सजा ताज
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पिछले चार साल के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के नामित कलाकारों की घोषणा की हैं। इसमें काशी के विभिन्न विधाओं के आठ कलाकार हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला। बनारस घराने के सिद्धहस्त कलाकारों की अगली पीढ़ियों को भी यह सम्मान मिला है। इसमें घराने के प्रख्यात कलाकार पं. राजन-साजन मिश्र की अगली पीढ़ी भी शामिल है।
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प्रो. राजेश शाह
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2024 : प्रो. राजेश शाह: सितार में बनारस और सेनिया घराने का किया नाम
बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के वाद्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेश शाह को 2024 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है। बनारस और जयपुर के सेनिया घराने के प्रख्यात सितार वादक प्रो. राजेश गायकी अंग के सितार वादक हैं। 33 साल से बीएचयू और वसंत महिला महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के बाद प्रोफेसर हुए। नौ साल की उम्र से ही उन्होंने सितार सीखना शुरू किया था। महाराष्ट्र के जलगांव में जन्म लिए प्रो. राजेश ने महाराष्ट्र के पं. गोविंद के बाद बनारस घराने के पं. अमरनाथ मिश्र से सितार की शिक्षा ली। इसके बाद बीएचयू में प्रो. रामदास चक्रवती से सेनिया घराने की वादन शैली सीखी। उनके निर्देशन में 20 विद्यार्थियों ने शोध किया और अब देश के अन्य विश्वविद्यालयों में शिक्षण सेवा दे रहे हैं।
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डॉ. रामशंकर मिश्र
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2023 : डॉ. रामशंकर मिश्र: गुरु के जाने पर रामायण के छह कांडों को संगीत में पिरोया
शास्त्रीय संगीत के साधक डॉ. रामशंकर मिश्र बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उनको 2023 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है। पं. रामाश्रय झा रामरंग के वरिष्ठ शिष्य डॉ. रामाशंकर ख्याल गायकी में पारंगत हैं। उन्होंने प्रयागराज विश्वविद्यालय के अलावा जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट में भी सेवा दी है। उनके गुरु द्वारा तैयार संगीत रामायण के बाकी बचे छह कांडों को डॉ. रामशंकर ने पूरा किया। इसकी प्रस्तुति मॉरीशस के रामायण सेंटर में दे चुके हैं।
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पं. जवाहर लाल
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2021 : पं. जवाहर लाल: चौथी पीढ़ी के बने साधक, नाना से सीखी शहनाई
काशी के प्रसिद्ध शहनाई वादक पं. जवाहरलाल को 2021 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है। उनकी चौथी पीढ़ी संगीत को आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि आखिरकार सरकार ने कला की पहचान की और सम्मान दिया। पं. जवाहर लाल ने 14 साल की उम्र से ही शहनाई की साधना शुरू कर दी थी। नाना नंदलाल, पं. महादेव प्रसाद मिश्र, कन्हैयालाल से शहनाई की शिक्षा ली। वह शहनाई के गायकी अंग का वादन करते हैं। रामापुरा के शहनाई घराने के वादकों में एक जवाहरलाल विदेशों में मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल में भी शहनाई की धुन बिखेर चुके हैं। उनको सुर शृंगार अकादमी सम्मान, यूपी गौरव अलंकरण सम्मान, संगीत भास्कर अलंकरण सम्मान भी मिल चुका है।
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पं. मंगल प्रसाद
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2024 : पं. मंगल प्रसाद: आठ साल में दुक्कड़ सीख बनाई पहचान
एक अलग तरह के वाद्ययंत्र दुक्कड़ के साधक पं. मंगल प्रसाद 76 साल के हैं। 60 साल से वह दुक्कड़ बजा रहे हैं। वह देश के नामचीन शहनाई वादकों के साथ संगत कर चुके हैं। पं. मंगल प्रसाद ने अपने पिता नान्हक राम से आठ वर्ष की उम्र से दुक्कड़ की शिक्षा ग्रहण की, जो अपने जमाने के प्रख्यात दुक्कड़ वादक थे। ठुमरी सम्राट पं. मंगल प्रसाद से भी दुक्कड़ वादन की बारीकियों के साथ लयकारी व ताल की शिक्षा ली। वह आकाशवाणी के ए ग्रेड के कलाकार हैं। वह तानसेन समारोह ग्वालियर, भोपाल गंगा महोत्सव, केरल, अहमदाबाद, जबलपुर, मुम्बई, कलकत्ता, भोपाल, दिल्ली, पुष्कर आदि शहरों में वादन कर चुके हैं। विदेशों में रूस, यूरोप और पुर्तगाल जैसे देशों में भी बजाए हैं। उन्हें कौस्तुभ कला रत्न सम्मान मिल चुका है।
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माला होम्बल
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2021 : माला होम्बल: भरतनाट्यम को हिंदी और संस्कृत में पिरोकर दिया विस्तार
भरतनाट्यम कलाकार माला होम्बल का सफर कर्नाटक, मध्यप्रदेश होकर काशी पहुंचा और आज काशी उनकी कर्मभूमि बन गई है। बीएचयू में प्रोफेसर रहे उनके पति स्व. प्रेमचंद होम्बल भी भरतनाट्यम में ही सिद्धहस्त थे। उन्होंने अपना संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार अपने पति को समर्पित किया। माला होम्बल के सास-श्वसुर भी इसी विधा में पारंगत थे। उनकी चौथी पीढ़ी भी इसी क्षेत्र में है। माला ने भरतनाट्यम को हिंदी और संस्कृत में पिरोकर बंदिशों से विस्तार दिया। उन्होंने इस नृत्य के साहित्य के भाव के साथ आंगिक संचालन दोनों को एकाकार किया। उन्होंने अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में तुलसी दास की चौपाई का मिश्रण किया। वह सौ से अधिक बच्चों को इस विधा में दक्ष कर चुकी हैं।
2024 : रितेश-रजनीश मिश्र: पिता पं. राजन और चाचा पं. साजन से सीखा गायन
प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण स्व. पं. राजन मिश्र के बेटे पं. रितेश-रजनीश मिश्र को भी 2024 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है। उन्होंने प्रसन्नता जताते हुए इस सम्मान को अपने पिता को समर्पित किया है। मिश्र बंधुओं ने 35 साल से ख्याल गायकी में अपनी अलग पहचान बनाई है। अपने पिता और चाचा पद्मभूषण पं. साजन मिश्र से संगीत की शिक्षा ली। दोनों रेडियो और आकाशवाणी के ए ग्रेड के कलाकार हैं। उनको उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, सुरमणि सम्मान मिल चुका है। यूरोप, यूएस सहित तमाम देशों में अपनी गायकी का जादू बिखेर चुके हैं।
2024 : पं. सुखदेव मिश्र: 10 साल की उम्र में बच्चों के वायलिन से सीखकर बनाई पहचान
बनारस घराने के सधे वायलिन वादक पं. सुखदेव मिश्र को 2024 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने कहा कि सरकार ने कला साधना की परख की। अपनी सातवीं पीढ़ी के ध्वजवाहक पं. सुखदेव मिश्र ने बताया कि परिवार में संगीत का माहौल था। मैं 10 साल की उम्र से ही वायलिन वादन सीखने लगा था। शुरू में बच्चों वाले वायलिन से अभ्यास किया। क्योंकि बड़े वायलिन नहीं बजा पाते थे। फिर बड़े पिता पं. नारायण दस मिश्र, पिता पं. भगवानदास मिश्र एवं बड़े भाई पं. सोमनाथ मिश्र से सीखा। वह यूएसएस, यूरोपीय देशों में बजा चुके हैं।