Varanasi News: सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य में हाईटेक इफेक्ट्स, असली हाथी-घोड़े और दमदार अभिनय ने इतिहास जैसा माहौल रचा। इस दौरान बरेका के सूर्य सरोवर के सामने मैदान पर खचाखच भरे दर्शकों में गजब का उत्साह दिखा।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : महमूद खान
बरेका के सूर्य सरोवर के सामने मैदान पर शाम करीब 9 बजे उस समय रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया, जब तीन अलग-अलग मंचों पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विभिन्न दृश्य एक साथ जीवंत होने लगे। कहीं बाल्यकाल की झलक तो कहीं युद्ध के मैदान में गूंजते वीरता के बोल और दृश्य ने दर्शकों को बांधे रखा। तस्वीरों में देखें- झलकियां
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : महमूद खान
जैसे ही मंच पर घोड़ों की टापें गूंजीं, पूरा माहौल ऊर्जा से भर गया। असली घोड़ों की तेज रफ्तार और सैनिकों के साथ उनका तालमेल इतना सटीक था कि दर्शक खुद को किसी ऐतिहासिक युद्ध का हिस्सा महसूस करने लगे।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : महमूद खान
वहीं, हाथी की धीमी लेकिन गरिमामयी चाल ने प्राचीन भारतीय वैभव और शक्ति की झलक पेश की। सम्राट विक्रमादित्य की भूमिका निभाने वाले कलाकार ने अपने प्रभावशाली संवाद, चेहरे के भाव और शौर्यपूर्ण अंदाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : महमूद खान
न्याय करते समय उनकी गंभीरता और युद्ध के दौरान उनका तेज हर रूप ने दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ी। कार्यक्रम में बालिकाओं की भागीदारी भी खास रही।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
रानियों, विदुषियों और अन्य पात्रों के माध्यम से उस दौर की सामाजिक और सांस्कृतिक तस्वीर को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : महमूद खान
हाईटेक लाइटिंग, डिजिटल साउंड, एलईडी बैकड्रॉप और स्मोक इफेक्ट्स ने पूरे आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : महमूद खान
परंपरा और आधुनिक तकनीक का यह संगम दर्शकों के लिए एक अनोखा अनुभव साबित हुआ। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने इस लाइव इतिहास को खुलकर महसूस किया।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य
- फोटो : सूचना विभाग
कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी जिसमें आर्य भारत, सम्राट विक्रमादित्य, अयोध्या, शिव पुराण, 84 महादेव और श्रीहनुमान से जुड़ी झलकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : सूचना विभाग
यूपी और एमकी के सीएम ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
नीति कैसी होगी, न्याय कैसा होगा यह आज भी सम्राट विक्रमादित्य की नीति तय करती है। लव के बाद भगवान राम का मंदिर यदि किसी ने बनवाया तो वह महाराज विक्रमादित्य ही थे। ये बातें शुक्रवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेका में विक्रमादित्य महानाट्य के शुभारंभ अवसर पर कहीं। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ कार्यक्रम महानाट्य का शुभारंभ किया।
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वाराणसी में यूपी के सीएम योगी और एमपी के सीएम मोहन यादव।
- फोटो : अमर उजाला
यूपी और एमपी के मुख्यमंत्री शाम करीब छह बजे काशी पहुंचे थे। एमपी के सीएम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भेंट की जिसे शनिवार को श्रीकाशी विश्वनाथ में स्थापित किया जाएगा।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : सूचना विभाग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज यह सांस्कृतिक बंधन प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और उनकी प्रेरणा से सशक्त हो रहा है। काशी सनातन परंपराओं की महत्वपूर्ण नगरी है। मां गंगा के तट पर इस महान नाट्य रूपांतरण की पहली प्रस्तुति इसलिए भी विशेष बन जाती है।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : सूचना विभाग
सीएम ने कहा यह परंपरा मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी क्योंकि आज तो हम लोग बड़ी उत्सुकता के साथ इस नई कृति को मंचन के माध्यम से दिखा रहे हैं। जब हम लोग महाराज विक्रमादित्य की बात करते हैं, तो नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय भी माने गए हैं। विक्रमादित्य की परंपरा में महाराज भर्तृहरि नाथ संप्रदाय में प्रतिष्ठित हुए। उनकी दीक्षा की भूमि उज्जैन थी, वही उनकी साधना की भूमि काशी के निकट चुनार का किला रहा।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : सूचना विभाग
सीएम योगी ने कहा जाता है कि चुनार किले का निर्माण भी महाराज भर्तृहरि के नाम से जुड़ा हुआ है। तीन भाइयों जोड़ी जगत में विख्यात है। भगवान राम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की जोड़ी से मिलता है। उसी प्रकार भर्तृहरि और महाराज विक्रमादित्य की जोड़ी भी उतनी ही प्रसिद्ध है।
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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : सूचना विभाग
जब इस नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के समक्ष आया, तो मेरा पहला सुझाव था कि इसका आयोजन काशी में किया जाए। इसके लिए जिला प्रशासन से भी चर्चा हुई।
काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन
- फोटो : सूचना विभाग
साथ ही, यह प्रस्ताव भी रखा गया कि यदि बरेका में पहले से कोई अन्य कार्यक्रम निर्धारित हो, तो चुनार को भी आयोजन स्थल के रूप में चुना जा सकता है क्योंकि वह महाराज भर्तृहरि की साधना स्थली रही है।