पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शनिवार शाम से देर रात तक गुजराती तड़का लगा। मौका था अस्सी घाट पर गुजरात सरकार द्वारा आयोजित सदाकाल गुजरात उत्सव का। कार्यक्रम का शुभारंभ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी ने किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्रधानमंत्री बनने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तो गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में गुजरात सरकार कार्यक्रम करा रही हो तो फिर तो धमाल देखने लायक था। सांझ ढलने के बाद घने कोहरे के बीच गुजराती लोक नृत्य, गीत और हास्य-विनोद की सतरंगी छटा देश-दुनिया के पर्यटकों, संस्कृति पसंद लोगों के लिए यादगार बन गई। इसी के साथ काशी में दो दिवसीय सदाकाल गुजरात उत्सव का जोरदार आगाज हुआ। यह उत्सव गुजरात के नॉन रेजीडेंसियल गुजराती फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया था। नॉन रेजीडेंसियल गुजराती ने उत्सव में आए लोगों से स्वागत करते कहा, केम छो....
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गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी दो घंटे देरी से घाट पर पहुंचे
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गुजरात के सीएम ने किया उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
कोहरे के चलते गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी दो घंटे देरी से घाट पर पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सुबह-ए-बनारस के आरती स्थल पर शहनाई की गूंज और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच गंगा की पूजा की। इसके बाद उन्होंने दीप जलाकर सदाकाल गुजरात उत्सव का उद्घाटन किया।
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गंगा से साबरमती तक की शीतलता-प्रेम का बखान
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गंगा से साबरमती तक की शीतलता-प्रेम का बखान
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अस्सी घाट पर शनिवार को एक तरफ पतितपावनी गंगा से साबरमती तक की शीतलता-प्रेम का बखान हुआ तो दूसरी ओर बाबा विश्वनाथ से सोमनाथ तक की धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक रिश्तों की याद दिलाई गई। गुजरात सरकार ने सिर्फ काशी को ही नहीं, बल्कि यूपी को दिल से जोड़कर विकास के पथ पर बढ़ने संदेश दिया। दो राज्यों की संस्कृतियों के मिलन की हर घड़ी उम्मीदों और नई संभावनाओं से भरी थी।
डांगी-मिश्र रास लोक नृत्य ने छोड़ी छाप
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डांगी-मिश्र रास लोक नृत्य ने छोड़ी छाप
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उत्सव के मंच पर फूलों के हार एक-दूसरे के गले में प्रेम-अपनत्व की भावना प्रगाढ़ करने के लिए काफी थे। गुजरात के सीएम का गुजराती समाज के लोगों ने गुलदस्ता, शाल देकर सम्मान किया। गुजराती रास के अलावा पारंपरिक डांगी नृत्य पर हर हर महादेव के जयघोष होते रहे।
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अजब है तेरी माया/इसको कोई समझ न पाया/ सबसे बड़ा तेरा नाम भोले नाथ -भोलेनाथ
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भरत नाट्यम नृत्य पेश किया ईशा नागर और श्रेया गांगुली ने
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मोनालिसा पटेल, कंचन पटेल, गीता सहरिया के डांगी नृत्य के बाद काशी दर्शन पर आधारित भरत नाट्यम नृत्य पेश किया ईशा नागर और श्रेया गांगुली ने। इनके बाद ओस्मान मीर ने भजन पेश किया। बोल थे- अजब है तेरी माया/इसको कोई समझ न पाया/ सबसे बड़ा तेरा नाम भोले नाथ -भोलेनाथ... की प्रस्तुति की।
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गुजरात के मुख्यमंत्री
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गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी ने कहा कि बाबा काशी विश्वनाथ का धाम यहां है और गुजरात की धरती बाबा सोमनाथ की है। जब तक सूरज-चांद रहेंगे, तब तक काशी, यूपी और गुजरात का साथ रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यहां से सांसद चुने जाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब तो काशी से गुजरात का रिश्ता और भी गाढ़ा हो गया है। काशी में विकास की गंगा का बहनी तय है।
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अस्सी घाट पर शीतलहर के अहसासों को पीछे छोड़ा
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घने कोहरे के बीच गुजराती पारंपरिक लोक नृत्य की थिरकन ने अस्सी घाट पर शीतलहर के अहसासों को पीछे छोड़ दिया। गुजराती रास के अलावा पारंपरिक डांगी नृत्य पर हर हर महादेव के जयघोष होते रहे। सूफी गायक ओस्मान मीर ने अपने सुरों की कशिश से काशी के संगीत प्रेमियों को ठंड के बीच बांधे रखा। उत्सव के मंच पर फूलों के हार एक-दूसरे के गले में प्रेम-अपनत्व की भावना प्रगाढ़ करने के लिए काफी थे।
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नृत्य से कलाकारों ने बांधा समां
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गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी ने कहा कि गुजरात की संस्कृति और वहां की विशेषता से काशी के साथ यूपी को जोड़ने के लिए हम यहां आए हैं। यही नहीं जल्द ही ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के जरिए दुनिया के 110 देशों को जोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि बाबा काशी विश्वनाथ का धाम यहां है और गुजरात की धरती बाबा सोमनाथ की है। जब तक सूरज-चांद रहेंगे, तब तक काशी, यूपी और गुजरात का साथ रहेगा।
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नृत्य से कलाकारों ने बांधा समां
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गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी ने कहा कि काशी देश ही नहीं जगत में अपनी पौराणिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिकतम नगरी बनेगी। बाबा विश्वनाथ के दरबार और महामना की तपोभूमि से भारत परम वैभव के शिखर पर पहुंचेगा। उन्होंने गुजरातियों से अपील की कि पिछले सौ साल में आपने काशी और यूपी के बीच जो प्रतिष्ठा बनाई है उसे और बढ़ाइए। भावी पीढ़ी को गुजरात से जोड़ने का समाज के लोगों को उन्होंने न्योता भी दिया।
नृत्य से कलाकारों ने बांधा समां
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कार्यक्रम का संचालन किया हिना सक्सेना ने। इस दौरान सुबह-ए-बनारस के संचालक डॉ. प्रीतेश आचार्य ने गुजरात के सीएम से मिलकर अस्सी घाट पर 600 दिन की प्रभाती रागों की संगीत यात्रा की जानकारी दी।