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अरबपति निकला काली कमाई का कुबेर आरएस यादव, जानें कई और राज

Tue, 13 Jun 2017 02:51 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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rs yadav - फोटो : अमर उजाला
भ्रष्टाचार और अवैध वसूली जैसे संगीन आरोपों में गिरफ्तार पूर्वांचल के 'यादव सिंह' आरएस यादव की काली करतूतों का खुलासा होना शुरू हो गया है। अब तक जांच में उसकी अरबों की संपत्ति का सामने आई है। आगे की स्लाइड में जानें कई और राज...
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rs yadav - फोटो : अमर उजाला
भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार चंदौली के एआरटीओ प्रवर्तन आरएस यादव ने अपनी काली कमाई ट्रांसपोर्ट कारोबार और जमीन में खपाई है। शुरुआती जांच में ही अरबों की संपत्ति की जानकारी सामने आ चुकी है। कई संपत्तियां दूसरों के नाम हैं। प्रदेश के बाहर कुछ बड़े निवेश का भी पता चला है लेकिन इस बारे में अभी तफ्तीश जारी है और फिलहाल कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
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rs yadav - फोटो : अमर उजाला
चंदौली पुलिस और विजिलेंस की अब तक की जांच में पता चला है कि ‘आरएस ट्रवेल्स’ नाम से यादव की पंद्रह वोल्वो बसें वाराणसी से दिल्ली समेत विभिन्न शहरों के लिए चलती हैं। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक वोल्वो की कीमत करीब पचास लाख है। बाबतपुर में 35 बिस्वा जमीन के बारे में भी पता चला है। इस जमीन पर एक कंपनी के साथ मिलकर कारोबार करने की योजना थी।

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rs yadav - फोटो : अमर उजाला
सेंट्रल जेल रोड पर तीन बिस्वा, पहड़िया के अनमोल नगर में 12 बिस्वा जमीन का भी पता चला है। लंका और रोहनिया क्षेत्र में भी यादव की जमीन के बारे में पता चला है, जिसकी पड़ताल की जा रही है। दिल्ली, नोएडा और लखनऊ में आरएस यादव के महंगे फ्लैट हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो यादव के एक पेट्रोल पंप होने की भी जानकारी हाथ लगी है। उससे जुड़े तथ्य खंगाले जा रहे हैं।
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rs yadav - फोटो : अमर उजाला
अब तक सामने आई संपत्तियों में कुछ यादव के परिवार केे सदस्यों के नाम और कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम हैं। इनमें वाराणसी के छावनी क्षेत्र में करीब पचास करोड़ की लागत का होटल वेस्ट इन भी शामिल है। वाराणसी और गोरखपुर में यादव के आलीशान मकान और अन्य संपत्तियों की परत दर परत खंगाली जा रही है। आरएस यादव से जुड़े लोगों की संपत्तियों का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।
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अदालत में पेश किये जाने के दौरान आरएस यादव - फोटो : अमर उजाला
चंदौली जिले का निलंबित एआरटीओ आरएस यादव एक वर्ष तक यहां तैनात रहा। वाहन स्वामियों में उसकी पहचान दबंग एआरटीओ के रूप में थी। वह आए दिन पैसेंजर टैक्स, रोड टैक्स के नाम पर वाहनों का चालान काटने के बाद सुलह-समझौते के नाम पर धन वसूली करता था। अवैध वाहनों को परमिट देने के नाम पर भी मोटी रकम ऐंठता था। वर्ष 1999 से 2000 तक आरएस यादव जनपद के एआरटीओ के पद पर तैनात रहा।
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आरएस यादव
एआरटीओ विभाग के सूत्रों की मानें तो अपने एक वर्ष की तैनाती के दौरान बहुत कम समय ही कार्यालय में बैठता था। अधिकांश समय सड़कों पर वाहनों के कागजात की जांच के साथ किसी न किसी बहाने चालान काटना उसकी आदत थी। रोजाना दर्जनों वाहनों का चालान करता था। चालान के बाद कार्यालय पहुंचे वाहन स्वामियों से मोटी रकम वसूलना इसके लिए आम बात थी। खासकर उस दौरान बिना परमिट के संचालित होने वाले वाहनों पर उसकी नजर रहती थी।

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वाहनों को पकड़ने के बाद सीज कर देता था। सीज करने के बहाने उन वाहन स्वामियों को परमिट देने के नाम पर वसूली करने में वह माहिर था। एआरटीओ आरएस यादव राजस्व वसूली करने के साथ ही अपनी जेब भी भरता था। एआरटीओ ने जनपद से एक वर्ष में लाखों रुपये की काली कमाई की। यहां के चर्चित सफेदफोशों में भी उसकी गहरी पैठ थी।
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rs yadav - फोटो : अमर उजाला
गलत तरीके से अकूत संपत्ति खड़ा करने के आरोपी चंदौली के एआरटीओ प्रवर्तन आरएस यादव की शासन में अच्छी पकड़ थी। वह बसपा शासन में प्रभाव रखने वाले एक आईएएस (अब सेवानिवृत्त) का चहेता था। आजमगढ़ से संबंध रखने वाले अधिकारी के संपर्क में होने के कारण आरएस यादव का अपने विभाग में भी वर्चस्व कायम था। इसकी वजह से कोई विरोध नहीं करता था। अधिकारी से उसके इतने करीबी संबंध थे कि उनके घर पड़ने वाले आयोजनों का खर्च भी उठाता था। वह हर स्तर पर अधिकारी का ध्यान रखता था।
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