वाराणसी के अस्सी घाट पर सोमवार को मिनी भारत का नजारा जीवंत हो गया। देश भर की संस्कृति, कला, शिल्प और खानपान के विविधताओं से भरा रस बनारस मेला सोमवार को अस्सी घाट पर शुरू हो गया। 22 फरवरी तक चलने वाले मेले में आने वाले दर्शकों के मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक आयोजनों को प्रस्तुत किया जाएगा। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
विज्ञापन
2 of 5
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
मेले में पारंपरिक, लोक और आदिवासी नृत्य महोत्सव के अलावा हस्तकला, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक खाद्य महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से किया गया है। महोत्सव में 40 से अधिक स्टाल लगाए गए हैं।
विज्ञापन
3 of 5
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा का बीन वादन, मणिपुर का लाईहरोबा, यूपी का लोकनृत्य, मिजोरम का चेरांव, झारखंड का छऊ और राजस्थान का कच्ची घोड़ी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। मेला प्रभारी एमएम मणि तिवारी ने बताया कि मेले में देश के सभी प्रांतों की कला और संस्कृति का समन्वय किया गया है।
4 of 5
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
मेले में मणिपुर, राजस्थान, दीमापुर, यूपी, उत्तराखंड, कोलकाता, राजस्थान, हरियाणा आदि प्रदेशों के शिल्पकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। सोमवार को मेले का उद्घाटन आधुनिक कला संग्रहालय नई दिल्ली के अद्वैत गण नायक ने किया। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम रस बनारस में 21 और 22 को सांस्कृतिक संध्या भी आयोजित की जाएगी।
इसके तहत 21 को मानमंदिर घाट पर अवंतिका मिश्र का तबला, पं. नरेंद्र मिश्र का सितार व पूरण महाराज का तबला, सौरव-गौरव का कथक और संजीव एवं अश्विनी शंकर का शहनाई वादन पेश किया जाएगा। 22 फरवरी को आयोजित दूसरी सांस्कृतिक संध्या में मालिनी अवस्थी की ठुमरी, विशाल कृष्णा एवं समूह का कथक और श्रुति सड़ोलीकर का शास्त्रीय गायन होगा।