बाबुल की प्यारी-प्यारी, लाडली हमारी चली अपने सजना के द्वार...विदाई गीत के साथ जब काशीपुराधिपति मां गौरा के साथ पालकी पर सवार होकर निकले तो हर-हर महादेव के घोष से रेड जोन गूंज उठा। पालकी उठाने वालों की आंखें भी नम थी लेकिन होठों पर हर-हर, बम-बम का जयघोष। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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- फोटो : अमर उजाला
महंत आवास से लेकर श्री काशीविश्वनाथ के गर्भगृह तक आकाश से लेकर जमीन तक अबीर-गुलाल से पट गया। डमरू और शंख ध्वनि के साथ रेड जोन परिसर गूंजता रहा। बाबा के साथ काशीवासियों ने जमकर होली खेली।
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रंगभरी एकादशी पर बाबा के साथ होली के साथ ही काशी की होली भी आरंभ हो गई। इस दौरान कई प्रदेशों के श्रद्धालु और विदेशी सैलानियों ने भी बाबा के गौने में हिस्सा लिया।
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सोमवार को रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ गौरा का गौना कराकर जब महंत आवास से लौटे तो भक्तों ने मंदिर परिसर में भी बाबा से अबीर और गुलाल से होली खेली। हालत यह थी कि रेड जोन पूरी तरह से गुलाबी रंगों में नजर आया।
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बाबा के पूजन का क्रम ब्रह्म मूहूर्त में महंत आवास पर आरंभ हो गया। वैदिक ब्राह्मणों ने बाबा एवं मां पार्वती की चल प्रतिमाओं का पंचगव्य तथा पंचामृत से स्नान के बाद बाबा को फलाहार का भोग लगाकार महाआरती की।
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इसके उपरांत राजसी ठाठ में शृंगार के बाद झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। मध्याह्न भोग आरती के दौरान दर्शन का क्रम रूका रहा।
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काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डा. कुलपति तिवारी ने बाबा की मध्याह्न भोग आरती की।