Ramnagar Ramlila 2025: काशी नगरी में विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का पारंपरिक शुभारंभ हो गया। 323 दिन बाद मिले नेमियों ने जय सियाराम...के उद्घोष के साथ एक-दूसरे का हाल जाना। एक महीने तक रामनगर लीला प्रेमियों से गुलजार रहेगा।
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रामनगर की रामलीला में क्षीर सागर की सजी झांकी।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
कंधे पर झोला, एक हाथ में मानस पोथी तो दूसरे में छड़ी और नजरें लीला के इंतजार में शुभ घड़ी पर गड़ी थीं। 323 दिन के पर नेमियों का एक दूसरे से सामना हुआ तो हाथ जुड़े और रामरम्मी से अभिवादन किया। जयसियाराम भइया.. के साथ अंकवार में समेटा और रामलीला शुरू होने से पहले ही भरत मिलाप दृश्य सजीव हो उठा।
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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के मंचन से पूर्व।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
शनिवार को काशी का उपनगर रामनगर राममय हो उठा। रंगकर्म के बजाय अध्यात्म-धर्म से सराबोर दुनिया के विशालतम और अनूठे मुक्ताकाशीय रंगमंच का पर्दा संपूर्ण विधि विधान और अनुष्ठान के साथ उठ गया। श्रद्धा के अनगिनत भावों से सजा रामबाग क्षीरसागर में तब्दील हुआ और इसमें शेष शैय्या पर श्रीहरि ने दर्शन दिए।
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विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में जुटी भीड़।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
लीला का आरंभ रावण जन्म प्रसंग से हुआ और उसने भाइयों समेत घोर तप किया। भगवान ब्रह्मा से अभय का वरदान पाने के अहंकार में रावण ने विश्वकर्मा द्वारा बनाए स्वर्ण महल पर आक्रमण तो किया ही ब्राह्मणों के यज्ञ व हवन में विघ्न भी डालना शुरू कर दिया।
मेघनाद ने तो इससे आगे बढ़ते हुए देवराज इंद्र को बंदी बना लिया और इंद्रजीत का अलंकरण पाया। श्वेत महताबी की रोशनी से नहाए रामबाग पोखरे ने क्षीरसागर का रूप लिया और शेष शैय्या पर लेटे श्रीहरि की झांकी निखर उठी।
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लीला में शामिल होने जाते पात्र।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
लीला स्थल पहुंचे पंच स्वरूप : रामलीला से पहले दोपहर दो बजे पंच स्वरूपों का व्यासगणों की निगरानी में साज शृंगार किया गया। विधि विधान से मुकुट पूजन कर धारण कराया गया। चार बजे उन्हें कंधे पर बैठाकर दुर्ग पहुंचाया गया। रस्म पूरी कर बैलगाड़ी से उन्हें लीला स्थल ले जाया गया।
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माथे पर चंदन लेपन के साथ शामिल हुए भक्त।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
हाथ में मानस पोथी और छड़ी, आंखें प्रभु की लीला पर गड़ीं : शिव की नगरी काशी के उपनगर रामनगर में शनिवार को त्रेता युग उतर आया। हर डगर पर रामचर्चा और रामजी की लीला दर्शन के लिए अपार जनसमूह तीसरे पहर रामबाग में जा मिला।
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हजारों की संख्या में पहुंचे लीला प्रेमी।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
चुप रहो का काशन और पसरा सन्नाटा : अचानक व्यास ह्रदय नारायण पांडेय के स्वर उभरे और उन्होंने चिरपरिचित अंदाज में चुप रहो, सावधान... का काशन दिया और घाट की सीढ़ियों पर सन्नाटे की चादर फेर दिया। समवेत स्वर में हर हर महादेव का घोषकर लीला स्थल पहुंचे काशीराज अनंत नारायण सिंह का अभिवादन किया। रात 8:26 बजे रामबाग पोखरे के क्षीरसागर में तब्दील हो जाने का संकेत दिया गया। रात 8:32 बजे श्रीहरि शेषशैय्या पर विराजे और लाल महताबी की रोशनी में दर्शन देकर विभोर किया।
पुलिस की जीप रही नदारद : पहले ही दिन रामनगर पुलिस की लापरवाही देखने को मिली। दरअसल पांच बजे काशीराज परिवार की सवारी निकलने से आधे घंटे पूर्व रामनगर के सिपाही और दरोगा दुर्ग के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करते हैं, लेकिन रामलीला के पहले दिन रामनगर थाने का कोई दरोगा और सिपाही दुर्ग के पास नहीं पहुंचा।
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लीला देखने जाते कुंवर अनंत नारायण सिंह।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
बग्घी पर निकली शाही सवारी
शाम पौने पांच बजे दुर्ग से काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह की बग्घी पर शाही सवारी निकली। सबसे आगे रामनगर पुलिस की जीप और उसके पीछे बनारस स्टेट का ध्वज लिए घुड़सवार चल रहे थे। दुर्ग से बाहर आते ही इंतजार में खड़े अपार जनसमुदाय ने हर-हर महादेव के उद्घोष से अगवानी की। लीला स्थल पर 36 वीं वाहिनी पीएसी की टुकड़ी ने हाथी पर सवार महाराज को सलामी दी। इसके साथ लीला शुरू हुई।
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लैंप लगाते कर्मचारी।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
बरेका में जलेगा 70 फीट का रावण
बरेका में विजयदशमी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। दशहरे पर दहन के लिए रावण और उसके भाइयों के पुतलों का निर्माण शुरू हो गया है। बरेका के केंद्रीय खेल मैदान पर विजयोत्सव के दिन 70 फीट के रावण का दहन होगा। कुंभकर्ण के पुतले की ऊंचाई 65 फीट और मेघनाद का पुतला 60 फीट का होगा।
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लीला में पूजन के दाैरान पात्र।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
दशकों से पुतलों का निर्माण कर रहे मंडुवाडीह निवासी शमशाद अपने पूरे परिवार के साथ काम में जुट गए हैं। विजया दशमी समिति के रूपक निदेशक एसडी सिंह व शमशाद ने बताया कि इस बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के निर्माण में 200 किलो मैदा, 150 पीस बांस, 200 किलो कागज, डेढ़ क्विंटल तांत, 150 पीस साड़ी, 50 किलो पेंट और एक किलो तूतिया का इस्तेमाल होगा। 10 व्यक्ति दो माह में पुतलों को तैयार करते हैं।
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रामलीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
मेयर ने रामनगर रामलीला मैदान का किया निरीक्षण
मेयर अशोक तिवारी ने शनिवार को रामनगर में विश्व प्रसिद्ध रामलीला मैदान मेला, पंचवटी मैदान व निषादराज मैदान का निरीक्षण किया। पंचवटी मैदान में एक पंप लगा था। यहां दो पंप लगाकर पानी निकालने के निर्देश दिए गए। मेयर ने कहा कि पूरे मैदान पर चूने का छिड़काव करें।
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मूर्ति पूजन के साथ शुरू हुआ विश्व प्रसिद्ध आयोजन।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
निषादराज मैदान में दो पंप लगाकर तत्काल पानी निकालकर सफाई कराई गई। उन्होंने रामलीला मैदान की सफाई कराने के निर्देश दिए। इस मौके पर नगर आयुक्त अक्षत वर्मा, प्रशांत सिंह पूर्व उपाध्यक्ष, नंदलाल चौहान, मंजू देवी, अजय सिंह, संतोष द्विवेदी, अनिरुद्ध कन्नौजिया, राघवेंद्र मिश्रा व गौरव गुप्ता मौजूद रहे।
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विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का मनोहारी मंचन।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
जाल्हूपुर टूड़ीनगर की भी रामलीला शुरू
जाल्हूपुर टूड़ी नगर की प्राचीन रामलीला का शुभारंभ शनिवार को धार्मिक अनुष्ठानों के बीच हुआ। संत रामरमी सरकार आश्रम परिसर में पीठाधीश्वर आनंद सरकार की अध्यक्षता में वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ पात्रों का मुकुट पूजन किया गया और रावण जन्म का प्रसंग मंचित हुआ। मंचन में रावण जन्म की झांकी ने लीला प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद राक्षसी आतंक की शुरुआत का मंचन किया गया।
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में पूजन करते पुरोहित।
- फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
देवताओं द्वारा भगवान विष्णु से अवतार लेने की प्रार्थना के बाद कच्चा बाबा मंदिर परिसर के पास तालाब में क्षीरसागर की झांकी सजाई गई। भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लेने का वादा किया। इस अवसर पर रामायणी दल के आचार्य सिंकू गुरु, गणेश दत्त पाठक, ब्रह्मदेव पांडेय, देवमणि तिवारी, विनोद सिंह गुड्डू, सुमित पांडेय, पंकज सिंह, टुनटुन सिंह आदि मौजूद रहे।