श्री आदि लाटभैरव वरुणा-संगम काशी की रामलीला शुरू
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भारत की सांस्कृतिक एकता हर तनाव पर भारी
रामलीला के व्यास दयाशंकर त्रिपाठी जयंत के संवादों को दिशा दे रहे थे, तो दूसरी ओर इमाम नमाज का क्रम आगे बढ़ा रहे थे। दोनों आयोजन एक साथ, एक ही स्थान पर, बिना किसी व्यवधान के चलते रहे। नमाज से पहले शुरू हुई रामलीला नमाज के बाद भी निर्बाध चलती रही। खास बात यह रही कि नमाज के बाद कई मुस्लिम भाइयों ने भी रामलीला के दर्शक के रूप में न सिर्फ हिस्सा लिया, बल्कि रामलीला में प्रसाद स्वरूप तुलसी और मिश्री भी ग्रहण किया। यह दृश्य न सिर्फ आंखों को सुकून दे रहा था, बल्कि दिल को यह यकीन भी दिला रहा था कि भारत की सांस्कृतिक एकता हर तनाव पर भारी है। काशी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी है, बल्कि प्रेम, एकता और सहिष्णुता का भी गढ़ है।