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रामनगर की रामलीला: जनकपुर से बरात विदाई, गूंजा जय सियाराम...; परिछन और शयन झांकी ने मोहा

Sun, 14 Sep 2025 05:51 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

रामनगर की रामलीला के मंचन के दाैरान विदेशी भी यहां पहुंचे हुए थे। राजा जनक के आग्रह पर महाराज दशरथ चारों युवराजों संग खिचड़ी खाने बैठे तो पूरा क्षेत्र जय सियाराम... के उद्घोष से गूंज उठा।
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जानकी के संग अयोध्या पहुंचे श्रीराम। - फोटो : अमर उजाला
सीय चलत ब्याकुल पुरबासी। होहिं सगुन सुभ मंगल रासी॥ भूसुर सचिव समेत समाजा। संग चले पहुँचावन राजा... अर्थात सीताजी के चलते समय जनकपुरवासी व्याकुल हो गए। मंगल की राशि शुभ शकुन हो रहे हैं। ब्राह्मण और मंत्रियों के समाज सहित राजा जनकजी उन्हें पहुंचाने के लिए साथ चले।
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रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
विश्वप्रसिद्ध रामलीला रंगकर्म के बजाय संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जो लोकरंग में पगे सहज संस्कारों को भी सजाती है। शनिवार को यह एक बार फिर जीवंत हुआ जब लीला प्रसंग अनुसार राजा जनक के आग्रह पर महाराज दशरथ चारों युवराजों संग खिचड़ी खाने बैठे। 
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रामनगर की रामलीला का मंचन। - फोटो : अमर उजाला
इसमें तरह-तरह के मिष्ठान पकवान व्यंजन परोसे गए तो रघुवर सुनो मधुर स्वर गारियां...खा लो खा लो खिचड़ी मेरे प्यारे लला..जैसी लोकाचारी गारियां भी गूंजी। इसे सुन सभी निहाल रहे तो महाराज दशरथ ने न्यौछावर देकर रस्म पूरी की। आठवें दिन की लीला में जनकपुर से बरात विदाई,अवध में परिछन तथा शयन झांकी की लीला का मंचन किया गया। 

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रामनगर की रामलीला। - फोटो : रोहित सोनकर
बरसात के कारण लीला लगभग पौने दो घंटा देर से शुरू हुई। राजा जनक के आदेश पर सतानंद महाराज ने राजा दशरथ को युवराज समेत खिचड़ी खाने को आमंत्रित करते हैं। मंडप में पहुंचने पर सभी का पांव धुलाकर आसन ग्रहण कराया गया। महाराज दशरथ द्वारा अयोध्या जाने की बात सुनकर राजा जनक उन्हें रोकते हैं। गुरु विश्वामित्र व सतानंद राजा जनक को समझाते हैं। 
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रामनगर की रामलीला। - फोटो : रोहित सोनकर
सखियां सीता को सेवा धर्म सीख देती हैं। राम सहित चारों भाई सास महारानी सुनयना का आशीर्वाद लेते हैं। भावुक राजा जनक दूर तक बरात विदा करने आते हैं,सभी उन्हें समझाकर वापस भेजते हैं। शुभ मुहूर्त में बरात अयोध्या में प्रवेश करती है। युवराजों के साथ ही चार-चार बहुएं आने की खुशी में अयोध्या आनंद से सराबोर हो जाती है। 
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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में पूजन करते पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला
महारानी कौशल्या, कैकेयी व सुमित्रा हर्षित नवयुगलों का परिछन कर आरती उतारती हैं। विश्वामित्र के विदा मांगने पर महाराज दशरथ खुद के साथ ही पुत्रों पर भी स्नेह रखते हुए सदैव दर्शन देने को कृपा मांगते हुए उनके चरणों पर गिर पड़ते हैं। विश्वामित्र आशीर्वाद प्रदान कर अपने आश्रम लौट जाते हैं।
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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के मंचन से पूर्व। - फोटो : अमर उजाला
जाल्हूपुर की रामलीला में हुई खिचड़ी रस्म, गारी गीतों से माहौल हुआ विनोदमय
जाल्हूपुर की प्राचीन रामलीला में शनिवार को विवाह उपरांत खिचड़ी रस्म का मंचन किया गया। इस दौरान सीता की सखियों ने पारंपरिक गारी गीतों और मंगलगीतों के माध्यम से मंचन को जीवंत बना दिया। 
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विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला। - फोटो : अमर उजाला
गारी गीतों की हंसी-ठिठोली और संवाद ने लीला को मनोरंजक रंग प्रदान किया, वहीं मंगलध्वनियों से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। परंपरागत गीतों और रस्मों के साथ हुई इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ा। रामायणी सुरेश व्यास, रजदेव यादव, घरभरन यादव, जसवंत सिंह, रघुनाथ यादव ने गारी गीतों पर सुर ताल जमकर सजाया।
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