विस्तारीकरण के दौर से गुजर रहे लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की चकाचौंध पर भी कहीं किसी की नजर न लग जाए, इसके लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने आधुनिक युग में भी टोटका किया है। आगे की स्लाइड्स में जानिए क्या है टोटका?
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- फोटो : अमर उजाला
द्वापर युग में भगवान कृष्ण को बार-बार निहारने के कारण मां यशोदा की नजर लग जाती थी। कान्हा को नजर से बचाने के लिए यशोदा उनके माथे पर काला टीका लगाती थीं। प्रिय लगने वाली किसी भी चीज को नजर से बचाने का टोटका अब भी समाज में प्रचलित है।
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करीब 7-8 हजार यात्रियों के रोजाना उड़ान भरने वाले इस एयरपोर्ट को सजाने-संवारने के साथ ही इसे बुरी नजर से बचाने के भी जतन किए जा रहे हैं। हवाई अड्डे के आगमन और प्रस्थान वाले द्वारों समेत कई स्थानों पर काले टीके वाले मटके तो यही बता रहे हैं।
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टोटके की देसज परंपरा को एयरपोर्ट प्रशासन ने इस तरह अपनाया है, जैसे कारोबारी अपने दफ्तर या दुकान के बाहर नींबू-मिर्च और नागफनी के कांटे की माला लटकाकर करते हैं। 50 से अधिक जहाजों के बेड़े वाले हवाई अड्डे के नवनिर्मित टर्मिनल भवन के आगमन और प्रस्थान द्वार पर इसे हर रोज हजारों लोग निहार रहे हैं।
बाबतपुर हवाई अड्डे की री-कॉरपेटिंग चल रही है। रन-वे विस्तार के साथ ही आने वाले समय में उड़ानें बढ़ाई जाएंगी और इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के इस हवाई अड्डे के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने आसपास के गांवों के किसानों की जमीनें भी चार गुना अधिक मुआवजा देकर खरीद ली हैं।