प्रदोष व्रत भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष तिथि है। इस तिथि में व्रत व पूजन का विशेष महत्व होता है। इस बार प्रदोष व्रत बेहद खास होने जा रहा है। आगे की स्लाइड में पढ़ें पूरी खबर...
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- फोटो : अमर उजाला
ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति प्रदोष व्रत रखता है, उसको मां पार्वती और भगवान शंकर की कृपा मिलती है। महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति महाराज ने गाजीपुर के सिद्धपीठ श्री हथियाराम मठ पर चल रहे चातुर्मास महायज्ञ में शनिवार को पड़ने वाले शिव शनि प्रदोष के महत्व पर प्रकाश डाला।
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- फोटो : अमर उजाला
श्री यति महाराज ने बताया कि इस बार श्रावण माह में प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ने के कारण भगवान शिव और माता पार्वती के साथ ही शनिदेव की भी कृपा प्राप्त होगी। प्रदोष व्रत त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। ज्योतिषों के अनुसार इस बार का प्रदोष व्रत पुण्यकारी है।
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शनि
शनि प्रदोष में खास तौर पर भगवान को तिल का भोग अर्पित करना चाहिए साथ ही गरीबों को भी भोग खिलाना चाहिए। काले छाते व जूते का दान करना चाहिए। इससे राशि में शनि देव की कृपा मिलती है और चंद्र देव से होने वाले सभी दोषों से मुक्ति मिलती है।
हिन्दू धर्म परंपराओं में प्रदोष काल यानी दिन-रात के मिलन की घड़ी में, भगवान शिव की पूजा व उपासना बहुत शुभ फलदायी मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि प्रदोष व्रत को रखने से आपको दो गायों को दान देने के समान पुण्य मिलता है। उन्होंने बताया कि जिनको संतान प्राप्ति की कामना हो, उन्हें शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत अवश्य रखना चाहिए। इससे उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।