ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि व्रत करने वाले व्यक्ति को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान ध्यान करके अपने आराध्य देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद दाहिने हाथ में फूल, फल और कुश लेकर प्रदोष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूरे दिन निराहार व्रत रखना चाहिए और शाम के समय फिर से स्नान करके साफ कपड़े पहनना चाहिए। पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव की पूजा- पंचोपचार, दशोपचार, षोडशोपचार से करना सही माना जाता है। भगवान शिव का अभिषेक करके उन्हें वस्त्र, आभूषण, बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतु फल, नैवेद्य आदि अर्पित करके उनका श्रृंगार करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर आरती करनी चाहिए।