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वाराणसी की आबोहवा में जहर घोल रहा प्रदूषण, पानी छिड़क कर कम करने का हो रहा असफल प्रयास

Sat, 03 Oct 2020 01:09 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वाराणसी में शुक्रवार को सेंट्रल जेल रोड पर उड़ रही धूल। - फोटो : अमर उजाला।
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बनारस की जहरीली हवा को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन के पास कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वायु गुणवता मापने वाले स्टेशन के आसपास पानी का छिड़काव करके एयर क्वालिटी को नियंत्रित करने की नाकाम कवायद जारी है।

शुक्रवार को भी बनारस में सबसे अधिक प्रदूषित इलाका बौलिया, कैंट, तरना, भेलूपुर, शास्त्री चौक और आदमपुर रहा। वहीं सबसे बेहतर एक्यूआई चितईपुर और बीएचयू में रहा।
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शहर में चल रहे निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी भारी पड़ रही है। शुक्रवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर जारी शहर के वायु गुणवता सूचकांक के अनुसार बौलिया में एयर क्वालिटी इंडेक्स 290, कैंट स्टेशन इलाके में 277, तरना में 273, भेलूपुर में 243, आदमपुर में 210 और शास्त्री चौक में 215 रहा। वहीं दूसरी तरफ चितईपुर में एक्यूआई 46, बीएचयू में 72, मंडुवाडीह में 73, मलदहिया में 101, सारनाथ में 102, अर्दली बाजार में 105, पडाव में 107 और पंचक्रोशी मार्ग पर 125 एक्यूआई दर्ज किया गया।
 

निर्माण कार्यों ने बढाई परेशानी

क्लाइमेट एजेंडा की प्रमुख एकता शेखर ने बताया कि हालांकि एक शोध में पाया गया कि शहर में हरित आवरण बढने से विशेष रूप से पेड़ पौधों के साथ उचित यातायात और सड़क प्रबंधन से वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से हुए शोध के अनुसार कचरे और बायोमास को जलाना, शहर में लगने वाला जाम, शहर में चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों की मरम्मत और खोदाई को पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार पाया गया।
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हरियाली ढूंढते रह जाओगे

शहर पूरी तरह से कंक्रीट का जंगल बन चुका है। कई मोहल्ले में जल चढ़ाने के लिए नीम और पीपल के पेड़ तक नहीं बचे हैं। सड़क किनारे कहीं छांव के लिए भी पेड़ नहीं हैं। जहां थोड़ी बहुत हरियाली है, वहां भी पेड़ों को सुखाकर बिल्डिंग तानने की तैयारी है। वीडीए के ग्रीन बेल्ट में भी धड़ाधड़ निर्माण हो रहे हैं। जब पेड़ ही नहीं हैं तो भला हवा से जहर कैसे कम होगा।

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पीएम 10 की मात्रा है खतरनाक

कैंट और गोदौलिया क्षेत्र की हवा में सबसे अधिक पीएम 10 की मात्रा है। गोदौलिया से बांसफाटक के इलाके की हालत तो सबसे अधिक खराब है। यहां एयर पॉल्यूटेंट नॉर्मल लेवल से कहीं ज्यादा है। कैंट स्टेशन के आसपास के इलाकों में दौडने वाली गाडियां रोज 135.5 से लेकर 140.5 माइक्रोग्राम सल्फ रडाई ऑक्साइड उगलती हैं। तकरीबन इतना ही परसेंट नाइट्रोजन, कार्बन मोनो ऑक्साइड आदि गैसों का भी है। वहीं गोदौलिया में इन जहरीली गैसों का प्रतिशत 130 माइक्रोग्राम के आसपास है
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