वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र का सिंहपुर गांव बुधवार रात गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। 21 जनवरी के बाद यह ऐसा दूसरा मौका था जब वाराणसी पुलिस एक्शन में थी। लगातार वारदातों को अंजाम देकर व्यापारियों के बीच आंतक का पर्याय बन चुका 25 हजार का इनामी बदमाश रामबाबू यादव बुधवार की रात हत्थे चढ़ा। पुलिस की गोली से घायल बदमाश अभी अस्पताल में है। मुठभेड़ में क्राइम ब्रांच प्रभारी की जान बाल बाल बची। सिंहपुर गांव के लोग अपने दरवाजों और चाय-पान की दुकानों पर रोजमर्रा की बातों में मशगूल थे। अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट सुन ग्रामीण सहम गये। आगे की स्लाइड्स में पढिए इस एनकाउंटर की डिटेल रिपोर्ट...
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सिंहपुर गांव के लोग तरह-तरह की आशंकाओं से घिरे थे। कुछ ग्रामीणों ने पुलिस वाहनों को उधर जाते हुए देखा था। कुछ लोगों ने सोचा कि कहीं गोली उन्हें न लग जाय, इसलिए घरों में बंद हो गये। जबकि कुछ लोग यह जानने के लिए बेताब थे कि आखिर हुआ क्या है? सादे वेश और वर्दी में पुलिसकर्मी इधर-उधर भाग रहे थे। अचानक एक व्यक्ति के चीखने की आवाज आई। गोलियां की तड़तड़ाहट बंद हुई तो उन्हें पता चला कि पुलिस और बदमाशों में मुठभेड़ हो रही थी। गोलीबारी में एक बदमाश घायल हो गया जबकि उसका साथी अंधेरे का पायदा उठाकर फरार हो गया।
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बदमाशों ने क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह के सीने को लक्ष्य कर गोली चलाई थी लेकिन बुलेट प्रूफ जैकेट पहनने के कारण वह बच गए। फरार दीपक की तलाश में पुलिस की कांबिंग जारी है। वाराणसी के मध्यमेश्वर निवासी रामबाबू कोतवाली थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट सहित अन्य आरोपों में बनारस और आजमगढ़ में 25 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, लक्सा निवासी दीपक पर 20 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। दोनों एक व्यापारी को लूटने के लिए घात लगाकर बैठे थे।
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एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि दो बदमाशों की मौजूदगी की सूचना पर क्राइम ब्रांच प्रभारी अपनी टीम के साथ सारनाथ इंस्पेक्टर अखिलेश मिश्र को सूचना देते हुए वहां पहुंचे। घेरेबंदी देख बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी तो पुलिस ने कार्रवाई की। 28 से 30 राउंड हुई फायरिंग के बीच एक बदमाश भाग निकला जबकि बाएं पैर में गोली लगने के कारण रामबाबू पकड़ा गया।
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हिस्ट्रीशीटर रामबाबू यादव वर्ष 2010 में मुठभेड़ में मारा गया मुन्ना बजरंगी गिरोह का शूटर बाबू यादव का भांजा है। रामबाबू का छोटा भाई श्याम बाबू करीब 13 साल पहले भाजपा नेता दयाशंकर मिश्रा के ऊपर जानलेवा हमले के दौरान क्रास फायरिंग में मारा गया था। भाई की मौत के बाद रामबाबू पूरी तरह जरायम की दुनिया में उतर आया। फिर रईस बनारसी और सनी सिंह की शागिर्दी में कुख्यात हो गया।
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2015 में सनी के एनकाउंटर के बाद उसके गिरोह के कई सदस्य रामबाबू के साथ आ गए। रामबाबू जेल से ही अपना गिरोह संचालित करने लगा। अभी पिछले दिनों होली के पहले जेल से जमानत पर छूटे रामबाबू ने मध्यमेश्वर स्थित पैतृक आवास को छोड़कर कोनिया में अपना नया ठिकाना बनाया था। बीते साल शिवपुर क्षेत्र में मुठभेड़ में पुलिस ने रामबाबू को गिरफ्तार किया था जबकि रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू सहित उसके दो साथी भाग निकले थे। मारे गए बदमाश सनी के साथ रामबाबू ने वर्ष 2011 में दशाश्वमेध क्षेत्र में लस्सी विक्रेता गोपाल यादव की हत्या की थी।
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हाल के दिनों में जेल से बाहर आने पर 27 मार्च की रात रामबाबू अपने चार साथियों के साथ दारानगर के पार्षद मनोज यादव के घर पहुंचा था। उनके भाई कृष्णा की कनपटी पर असलहा सटा दिया था। धमकाया था कि यदि मेरे मामले में किसी ने गवाही दी तो पूरे परिवार को जान से मार दूंगा। मुहल्ले के लोग इकट्ठा हुए तो रामबाबू भाग निकला था। इसी मामले को लेकर रामबाबू के खिलाफ कोतवाली थाने से 25 हजार का इनाम घोषित हुआ था।
मंगलवार को रामबाबू ने गोइठहां में असलहा सटाकर मार्कंडेय यादव की बाइक लूट ली थी। बुधवार को रामबाबू गिरफ्तार हुआ तो उसके पास से ही वहीबाइक बरामद हुई। पुलिस के अनुसार रामबाबू विशेश्वरगंज क्षेत्र की मंडियों से लेकर रामनगर तक के व्यापारियों से रंगदारी वसूलता था। कई व्यापारी उसके खौफ में चुपचाप रकम पहुंचा देते थे। विवादित जमीनों पर कब्जा कराने में भी रामबाबू का दखल रहता था।