68वां जन्मदिन अपने संसदीय क्षेत्र में मना कर पीएम मोदी ने यहां के जन-जन से अपने रिश्तों को और मजबूती दी। 68वें जन्मदिन पर संसदीय क्षेत्र में मिला अभूतपूर्व अपनापन पीएम मोदी को हमेशा याद रहेगा। वाराणसी के सांसद के जन्मदिन पर पूरे शहर में जश्न का माहौल रहा। इस जन्मदिन से पीएम मोदी ने काशी से अपना रिश्ता और मजबूत कर लिया। आगे की स्लाइड्स में देखें ‘काशी कनेक्शन’....
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सोमवार को अपना 68वां जन्मदिन अपने संसदीय क्षेत्र में मना कर पीएम मोदी ने यहां के जन-जन से अपने रिश्तों को और मजबूती दी। वहीं इससे अभिभूत काशीवासियों ने उत्साह से शहर को भाजपा झंडों से पाटने, मंदिरों में पूजा-पाठ, मलिन बस्तियों में स्वच्छता अभियान चलाने और मिठाई बांटने के साथ जगह-जगह दीपावली जैसी रोशनी कर प्रधानमंत्री के लिए जन्मदिन को न सिर्फ यादगार बना दिया, बल्कि बदलते बनारस का प्रमाण भी दे दिया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में सांस्कृतिक राजधानी कही जाने वाली काशी का कायाकल्प कर दिया है। काशी अब गंगा घाटों, काशी विश्वनाथ मंदिर और बीएचयू की पहचान से बहुत आगे बढ़ गया है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने हर स्तर पर काशी की मजबूत ब्रांडिंग के मौकों को मुहिम चलाकर मुकाम तक पहुंचाया।
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पीएम मोदी ने 2014 में अस्सी घाट से स्वच्छता मुहिम शुरू की। सांसद आदर्श ग्राम के रूप में जयापुर को गोद लेकर समृद्ध ग्रामीण भारत की कल्पना के लिए कदम भी यहीं से बढ़ाया। संसदीय क्षेत्र में बुनियादी साधन विकसित करने के लिए जहां अत्याधुनिक संसाधनों का प्रयोग किया तो समन्वय स्थापित करने की सलाह देते हुए परंपराओं और पुरातन व्यवस्था को मूल स्वरूप में रखने के लिए ‘हृदय’ और ‘प्रसाद’ शुरू कीं।
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बाबतपुर एयरपोर्ट से नई सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। दीनदयाल हस्तकला संकुल से वाराणसी के साथ-साथ पूर्वांचल के बुनकरों और हस्तशिल्पियों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिली है। बदलते दौर में काशी को दुनिया की निगाह में लाने के लिए प्रधानमंत्री की इच्छा शक्ति का ही परिणाम रहा कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में शामिल हुए तो फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां ने गंगा में नौका विहार किया।
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पूर्वी भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की शुरूआत बीएचयू में कैंसर शोध संस्थान और सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के शिलान्यास से की तो बीएचयू में ‘लाइक एम्स’ सुविधाएं देने की पहल भी उन्हीं की पहल पर हुई। आने वाले दिनों में काशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तारीकरण और अपने आराध्य के ‘दरबार’ में श्रद्धालुओं को अधिकतम सुविधाएं दिलाना उनका ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ है।
मेन गेट से अंदर तक मोदी कटआउट, योजनाओं की होर्डिंग्स से पटा परिसर
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पर इसी साल काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं अगले साल जनवरी में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन के जरिए दुनिया काशी के ज्ञान, संस्कार और ‘अतिथि देवो भव’ को नए परिप्रेक्ष्य में फिर से जानेगी।