यूपी के जौनपुर जिले के रेहटी गांव में शुक्रवार दोपहर दर्दनाक हादसे के बाद मातम का माहौल है। जेसीबी की टक्कर से घर की दीवार गिरने से चार परिवारों की खुशियां पल भर में उजड़ गई। मलबे में दबने के कारण तीन बच्चों की मौत हो गई तो वहीं एक अभी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहा है। जिन तीन बच्चों की मौत हुई है उससे दो घरों का इकलाता चिराग भी बुझ गया। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : अमर उजाला
रेहटी गांव में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद पीड़ित परिजनों ने मकान मालिक और जेसीबी चालक के खिलाफ तहरीर दी है। गांव में महेंद्र यादव के घर के बाहर ट्रक से बालू गिराया गया था। यह रास्ते में फैला था। शुक्रवार को जेसीबी से बालू चहारदीवारी के भीतर रखा जा रहा था। इसी दौरान जेसीबी के धक्के से 15 फीट लंबी आठ फीट ऊंची दीवार बाहर ढह गई और पास में खेल रहे गांव के चार बच्चे मलबे में दब गए। ग्रामीणों ने सभी को बाहर निकाला।
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आयुष (4) पुत्र अनिल राजभर की मौके पर मौत हो गई। जबकि असजद (6) पुत्र आफताब और हारिश (6) पुत्र इरफान व शिव राजभर (6) पुत्र सोनू को सीएचसी पहुंचाया गया। डाक्टर ने असजद और हारिश को मृत घोषित कर दिया, जबकि शिव राजभर को ट्रामा सेंटर भेज दिया गया। सूचना पर एसडीएम केराकत चंद्रेश सिंह, सीओ सिटी नृपेंद्र पहुंच गए। बवाल की आशंका पर पीएसी बुला ली गई।
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आफताब, इरफान और सोनू राजभर ने मकान मालिक महेंद्र यादव बल्ला तथा अज्ञात जेसीबी चालक के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। एसपी दिनेशपाल सिंह का कहना है कि तहरीर मिली है। आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी। डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने कहा पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से मदद दिलाई जाएगी। तीन बच्चों की मौत की घटना लापरवाही का नतीजा है। ग्रामीणों की माने तो मकान मालिक और जेसीबी चालक दोनों की ही लापरवाही से हादसा हुआ है।
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जिन तीन बच्चों की मौत हुई है उससे दो घरों का इकलाता चिराग भी बुझ गया। आयुष और असजद अपने माता पिता के इकलौते बेटे थे। हादसे में इसी गांव के अलग अलग परिवारों के तीन बच्चों की मौत से गांव में मातम छाया है। तीनों परिवारों की माली हालत ठीक नहीं हैं। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने मृत बच्चों के परिजनों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया है। हादसे में मृत आठ वर्षीय आयुष अपने माता पिता का इकलौता बेटा था।
उसकी बहन सोनाली ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती है। पिता पिता बाजार की दुकान पर मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। जबकि असजद भी अपने मां बाप का इकलौता बेटा था। असजद चार बहनों के बीच अकेला भाई था। बहन ऑलफिन (12), अमरीन (10), अपसा (6) और अजरा 2 वर्ष की है। असजद के पिता मुम्बई में अपना ब्यापार करते हैं। इसी हादसे में मृत हारिश दो भाई में बड़ा था । उसके पिता त्रिलोचन बाजार में मेडिकल स्टोर चलाकर परिवार चलाते हैं।