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बनारसः वर्षों पुरानी नागनथैया लीला को देखने तुलसी घाट पर उमड़ी भक्तों की भीड़

Mon, 23 Oct 2017 09:04 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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nathaiya - फोटो : अमर उजाला
विश्व की प्राचीन नगरी काशी में गंगा किनारे आस्था और विश्वास का अटूट संगम का नज़ारा उस वक़्त देखने को मिला जब यहां के तुलसी घाट पर गंगा कुछ समय के लिए यमुना में बदल गई और गंगा तट वृन्दावन के घाट में बदल गए। मौक़ा था कार्तिक मास में होने वाले लगभग 450 वर्ष पुराने श्री कृष्ण लीला की श्रृंखला में नागनथैया लीला के आयोजन का। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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काशी के तुलसीघाट पर सैकड़ों साल पुरानी परंपरा ‘नाग नथैया’ लीला सोमवार को फिर जीवंत हो उठी। शिव की नगरी काशी में गंगा जहां यमुना बनी वहीं कान्हा ने कदम के पेड़ से छलांग लगाकर कालिया नाग का मर्दन कर गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का संदेश दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
 
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कन्हैया के गंगा में कूदते ही वृंदावन बिहारी लाल की जयकार, हरहर महादेव के उद्घोष, घंटा-घड़ियाल की मधुर ध्वनि से पूरा गंगातट गूंज उठा। काशी के इस लक्खा मेले में उमड़े लोगों ने इस अलौकिक पल का नयनाभिराम किया और इस अद्भुत नजारे को अपने कैमरों और मोबाइल में कैद किया।
 

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अखाड़ा गोस्वामी तुलसीघाट की ओर से आयोजित करीब साढ़े चार सौ साल से अधिक इस परंपरा का निर्वहन बड़ी धूमधाम के साथ किया जाता है। दोपहर बाद से ही लीला को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। शाम चार बजे तक अस्सी से लेकर तुलसीघाट, रीवाघाट भदैनी तक हुजूम उमड़ पड़ा था। 
 
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लीला की एक झलक देखने के लिए घाट से लेकर छतों तक कहीं भी तिल रखने की जगह नहीं थी। करीब सवा चार बजे कान्हा ने गेंद को गंगा में फेंक दी। सखाओं के मना करने के बाद भी जिद पर अड़े कन्हैया कदम की डाल पर चढ़ गए और नदी में छलांग लगा दी। इस दौराना श्रद्धालुओं और दशनार्र्थियों की सांसे थम गई। 

 
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कुछ देर बाद भगवान श्रीकृष्ण वंशी बजाते बाहर आए तो लोग प्रभु को देख गदगद हो गए। इसके बाद तो हरहर महादेव की गूंज, डमरू की गड़गड़ाहट, आरती और भजन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कान्हा ने नदी की धारा में पूरा एक चक्कर लगाकर वहां मौजूद जनसैलाब को अपना दर्शन दिए। बटुकों ने आरती उतारी और सभी लोगों ने उनके चरणों में शीश नवाकर धन्य हुए। 
 
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संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वंभर नाथ मिश्र और प्रो विजय नाथ मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण को माला पहनाकर नमन किया। बजड़े पर सवार महाराज अनंत नारायण सिंह का स्वागत किया गया और परंपरा का निर्वहन करते हुए गिन्नी प्रदान की। व्यास श्याम बिहारी दास के निर्देशन में संजीत कुमार दुबे और शुभम पांडेय ने कृष्ण की भूमिका निभाई। 
 
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