काशी में आतिथ्य सत्कार का स्वरूप बदल रहा है। गंगा किनारे स्थित अलग-अलग राजघराने के महलों के अंदर इंटीरियर डेकोरेशन कर उसको राजस्थान के जयपुर और अन्य ऐतिहासिक शहरों की तरह पैलेस बनाए जा रहे हैं। काशी आने वाले पर्यटकों को ये पैलेस सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
जयपुर सहित राजस्थान के अन्य बड़े शहरों में तत्कालीन राजाओं के महलों और आवासीय स्थलों में कहीं फिल्मों की शूटिंग तो कहीं मेले जैसे बड़े-बड़े आयोजन हो रहे हैं। काशी भी इसी नक्शेकदम पर चलने लगी है।
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अब तक नदेसर कोठी, दरभंगा पैलेस, गुलेरिया कोठी मेहमाननवाजी के लिहाज से तैयार हो चुके हैं। दिग्पतिया घाट, राजा घाट, भोसले घाट और अहिल्याबाई होलकर के महल भी लीज पर लेकर पैलेस में तब्दील किए जा रहे हैं।
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विदेशी पर्यटक रजवाड़ों के पुराने महलों के बदले हुए स्वरूप की मांग सर्वाधिक कर रहे हैं। पैलेस काशी की पहचान बन गए हैं। सबसे अधिक आकर्षण गंगा तट वाले महलों की है। इन महलों से सुबह-ए-बनारस से लेकर गंगा की धारा में कलरव करते पक्षी देख विदेशी मेहमान आनंदित होते हैं।
वेदों, पुराणों में वर्णित काशी के घाट और मंदिर ही नहीं बल्कि यहां के महल और हवेलियां भी नायाब हैं। पुराने महाल भदैनी की हवेली इसका जीता जागता उदाहरण है। काशी के वैभव शिल्प को संजोये इस हवेली का जर्रा-जर्रा सीधा संवाद तो करता ही है रजवाड़ों की शानों-शौकत का प्रमाण भी बताता है।