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छठें और सातवें चरण में होगी पूर्वांचल के बाहुबलियों की अग्नि परीक्षा

Fri, 10 Feb 2017 04:49 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, वाराणसी
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mukhtar ansari brijesh singh - फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी यूपी से शुरु हुई चुनावी बयार अब पूर्वांचल तक पहुंच गई है। वाराणसी, बलिया, आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के 10 जिलों की 61 सीटों के लिए नामांकन शुरु हो गया है। आजमगढ़ मंडल की 21 सीटों पर जहां सात फरवरी से नामांकन हो रहा है वहीं वाराणसी और मिर्जापुर मंडल की 40 सीटों पर आज से नामांकन शुरु हुआ। सूबे की इन 61 सीटों पर बाहुबलियों की भूमिका काफी अहम होगी। आगे की स्लाइड में जानें बाहुबलियों का इतिहास और उनकी रणनीति-
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mukhtar ansari - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में बाहुबली राजनेताओं की बात हो तो मुख्तार अंसारी का नाम सबसे ऊपर है। उनके खिलाफ, हत्या, अपहरण, फिरौती सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। मुख्तार अंसारी का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में ही हुआ था। उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। जबकि उनके पिता एक कम्यूनिस्ट नेता थे।
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mukhtar ansari - फोटो : अमर उजाला
राजनीति मुख्तार अंसारी को विरासत में मिली। उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा और सियासी राह पर चल पड़े। 1988 में पहली बार हत्या के एक मामले में उनका नाम आया था। पूर्वांचल के मऊ, गाजीपुर, वाराणसी और जौनपुर में उनका काफी प्रभाव है। मुख्तार अंसारी पर आरोप है कि वो गाजीपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सैकड़ों करोड़ रुपए के सरकारी ठेके नियंत्रित करते हैं।

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mukhtar ansari abbas ansari - फोटो : अमर उजाला
सपा से संबंधों में खटास के बाद मुख्तार ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल का बसपा में विलय कर दिया है। वह बसपा के टिकट पर मऊ सदर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका बेटा अब्बास अंसारी घोषी और इनके भाई सिगबतुल्ला अंसारी गाजीपुर के मोहम्मदाबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्तार की रणनीति दलितों और अल्पसंख्यकों के वोटों के बल पर जीत हासिल करना है।
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munna bajrangi - फोटो : अमर उजाला
जरायम की दुनिया में कभी खासी दखल रखने वाला मुन्ना बजरंगी इस बार सियासी गलियारों की चर्चाओं से कई दिनों तक दूर रहे। इनकी पत्नी सीमा सिंह मड़ियाहूं चुनाव लड़ेगी लेकिन अभी किस पार्टी से लड़ेंगी, ये तय नहीं है। माना जा रहा है कि अपना दल कृष्‍णा पटेल गुट से मुन्ना की पत्नी को टिकट मिल सकता है। मुन्ना बजरंगी पूर्वांचल का डॉन है। मुन्ना बजरंगी गाजीपुर के भाजपा नेता कृष्‍णानंद राय की हत्या का मुख्य अभियुक्त है। वह अभी झांसी जेल में बंद है। पिछली बार खुद मुन्ना बजरंगी ने मड़ियाहूं से चुनाव लड़ा था।
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umakant yadav - फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल के एक और बाहुबली नेता और मछलीशहर के पूर्व सांसद उमाकांत यादव राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए हैं। उन्हें रालोद का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं रालोद ने उमाकांत यादव के बेटे दिनेश कांत यादव को पार्टी ने शाहगंज विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। बता दें कि उमाकांत यादव 1991 में बीएसपी से खुटहन वि‍धानसभा से वि‍धायक बने थे। इसके बाद 1993 में वे सपा बसपा गठबंधन से दूसरी बार इसी सीट से विधायक चुने गए। 2004 लोकसभा चुनाव में उमाकांत यादव जेल बंद रहते हुए एक बार फिर से मछलीशहर से बीएसपी के टि‍कट पर बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष केसरी नाथ त्रि‍पाठी को हरा कर सांसद बने।
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dhananjay singh - फोटो : अमर उजाला
धनजंय सिंह दो बार विधायक और एक बार सांसद रहे हैं। 2014 में सांसद का चुनाव लड़े निर्दल लड़े थे लेकिन हार गए। 2012 में इनकी पत्नी जागृति सिंह मल्‍हनी से निर्दल चुनाव लड़ी थी और 50 हजार से अधिक वोट पाई थी। इस बार खुद धनजंय सिंह निषादराज पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। धनंजय सिंह का अच्छा प्रभाव क्षत्रियों में है। दिल्ली में नौकरानी हत्याकांड में इनकी पत्नी का नाम आया था । वहीं 2007 में धनंजय सिंह की पहली पत्नी मीनाक्षी की उनके लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास पर संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।

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brijesh singh - फोटो : अमर उजाला
वहीं, बीते साल एमएलसी चुने गए पूर्वांचल के नामी बाहुबलि और मुख्तार अंसारी के धुर विरोधी बृजेश सिंह के भतीजे और पूर्व एमएलसी उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह के पुत्र सुशील सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। ये वर्तमान में सकलडीहा सीट से विधायक हैं । इस बार वह सैयदराजा से चुनाव लड़ रहे हैं। बजेश के खिलाफ हत्या, हत्या कराने का प्रयास और रंगदारी के मामले चल रहे हैं। बृजेश राजपूत समेत अगड़ी जातियों में प्रभाव रखते हैं। इनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह पूर्व एमएलसी रह चुकी है। सुशील सिंह बसपा से भी चुनाव लड़ चुके हैं। सकलडीहा से वह निर्दलीय प्रत्याशी थे।

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vinit singh - फोटो : अमर उजाला
विनित सिंह पूर्व एमएलसी रहे हैं। इनके ऊपर हत्या के प्रयास, रंगदारी के आरोप रहे हैं। ये सैयदराजा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनकी बृजेश सिंह से अदावत है। विनित सिंह की पकड़ राजपूत के साथ-साथ अन्य जातियों में भी है। अभी ये रांची की जेल में बंद थे । आज उन्हें जमानत मिल गई है। जल्द ही वह पर्चा दाखिला करेंगे। यहां सबसे ज्यादा रोचक मुकाबला होने की उम्मीद है। विनित का मुकाबला मनोज सिंह डब्लू और सुशील सिंह से होना तय है। ये तीनों ही राजपूत जाति के हैं। पूर्वांचल में सबसे ज्यादा लोगों की नजरें मुख्तार और विनित सिंह पर रहेगी।  
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विजय मिश्र
सपा से टिकट कटने के बाद बागी हुए बाहुबलि नेता विजय मिश्र राष्ट्रीय निषाद पार्टी के टिकट पर ज्ञानपुर विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे। उन्हें पीस पार्टी, अपना दल (कृष्णा), जन अधिकार मंच, महान दल समेत कई अन्य दलों का समर्थन भी मिलेगा।  इनके ऊपर 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, लूट आदि शामिल है। पूर्व मंत्री नंद गोपाल नंदी के ऊपर जानलेवा मामले में ये आरोपी हैं। इनका पूर्वांचल की ब्राह्मण राजनीति में काफी रसूख रहा है। ये 2002, 2007 और 2012 लगातार तीन बार विधायक चुने गए है।
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