यूपी में एनकाउंटर में मारे गए 30 लाख के इनामी नक्सली बृजेश गंझू को ढेर कर दिया गया है। नक्सली कमांडर ने अकेले दम पर 800 सदस्यों की टीम तैयार की थी। बृजेश गंझू जंगल और पहाड़ के बीच एके-47-एके-56 की अवैध फैक्टरी चलाता था। हथियारों की सप्लाई से बृजेश ने अकूत कमाई की थी। कोल इंडिया में बिना गए हर महीने परिजन और रिश्तेदार वेतन उठाते थे। रविवार को वाराणसी में एटीएस ने नक्सली कमांडर बृजेश गंझू को ढेर किया था।
यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारा गया 30 लाख का इनामी बृजेश गंझू को लेकर नया खुलासा हुआ है। गंझू हथियारों की अवैध फैक्टरी चलाता था। एटीएस के मुताबिक जंगल और पहाड़ के बीच एके-47, एके-56 जैसे अत्याधुनिक हथियार तैयार कराता था फिर छत्तीसगढ़, बंगाल और ओडिशा के नक्सलियों को सप्लाई करता था। इसके पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
एटीएस के मुताबिक भाकपा माओवादी से अलग होकर तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) की नींव रखने के पांच साल के अंदर बृजेश गंझू ने नेटवर्किंग चेन की तरह संगठन में 800 सदस्यों की टीम तैयार कर ली थी। बृजेश गंझू की दहशत इतनी थी कि कोल इंडिया में बिना काम किए ही उसके परिजन और रिश्तेदार वेतन उठाते थे।
लगभग 10 साल तक ऐसे ही चलता रहा। बृजेश गंझू का राजदार और संगठन का प्रमुख कमांडर 10 लाख का इनामी पलामू का शशिकांत गंझू उर्फ आरिफ जी है। एनआईए सहित अन्य जांच एजेंसियां शशिकांत की तलाश में भी लगी हैं। शशिकांत गंझू को असलहों की अच्छी जानकारी है।
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रामनगर में मुठभेड़ के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व यूपी एटीएस के जवान।
- फोटो : अमर उजाला
2006 में माओवादी संगठन छोड़कर टीएसपीसी में शामिल शशिकांत के सुझाव पर ही बृजेश गंझू ने एके-47 और एके-56 जैसे हथियार की फैक्टरी शुरू की थी। हथियारों की सप्लाई के जरिये बृजेश ने अकूत कमाई की।
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रामनगर में मुठभेड़ के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व यूपी एटीएस के जवान।
- फोटो : अमर उजाला
दो साल पहले पलामू में टीएसपीसी के श्रवण उरांव, प्रेम गंझू और शतु कुमार उर्फ शैलेंद्र को एके-47 समेत अन्य हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया था। तीनों टीएसपीसी के कमांडर आक्रमण गंझू के दस्ते के सक्रिय सदस्य थे।
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रामनगर में मुठभेड़ के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व यूपी एटीएस के जवान।
- फोटो : अमर उजाला
शशिकांत गंझू कर सकता है संगठन का नेतृत्व, 50 से ज्यादा मुकदमे
एटीएस के मुताबिक बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद संगठन का नेतृत्व शशिकांत गंझू के हाथ में जाने की अटकलें हैं। झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के थानों में शशिकांत पर 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।
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रामनगर में मुठभेड़ के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व यूपी एटीएस के जवान।
- फोटो : अमर उजाला
माओवादियों से बगावत पर मिलती थी टीएसपीसी में एंट्री, कम उम्र को तवज्जो
एटीएस के मुताबिक प्रतिबंधित संगठन टीएसपीसी (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) में माओवादियों से बगावत करने वालों को तुरंत भर्ती कर लिया जाता था। मुख्य रूप से ग्रामीण युवाओं, स्थानीय नेटवर्क और माओवादी संगठनों से टूटे कैडर पर बृजेश गंझू, शशिकांत गंझू और जेल में बंद नगीना की नजर रहती थी।
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रामनगर में मुठभेड़ के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व यूपी एटीएस के जवान।
- फोटो : अमर उजाला
बृजेश गंझू 15 साल की उम्र में ही नक्सलियों के बाल दस्ते में शामिल हो गया था। बाद में उसने अपना संगठन खड़ा किया था। इस तरह ही वह कम उम्र लोगों को संगठन में शामिल करता था। चतरा, पलामू, लातेहार और कोयलांचल क्षेत्रों में यह संगठन लेवी वसूली और आपराधिक वारदातों को स्थानीय युवाओं के जरिये अंजाम दिलवाता था।
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मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए।
- फोटो : एआई
उग्रवादियों के पारिवारिक, जातिगत या गुप्त स्थानीय संपर्कों के जरिये नए लोगों की भी एंट्री कराई जाती थी जिन्हें बाद में पोस्टरबाजी, लेवी वसूलने और हथियारों के संचालन का काम सौंपा जाता था।
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एटीएस को देखते ही बाइक पर पीछे बैठा बृजेश फायरिंग करने लगा।
- फोटो : एआई
2015 से कमजोर होता गया संगठन, अब सिर्फ 20-25 सदस्य ही सक्रिय
कोयलांचल में लेवी वसूली के लिए कुख्यात बृजेश गंझू किसी भी हद तक चला जाता था। 2008 से 2015 तक बृजेश गंझू के एक इशारे पर रकम पहुंचती थी। 2015 में बृजेश गंझू पर शिकंजा कसा और फिर 2018 में टेरर फंडिंग मामले में नामजद होने के बाद से संगठन के कई सक्रिय सदस्य, जोनल कमांडर मारे गए। गिरफ्तारियां हुईं। इसके बाद संगठन कमजोर होता गया। वर्तमान में शशिकांत गंझू, मुकेश समेत 20-25 सदस्य ही रह गए हैं।
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एटीएस को देखते ही बाइक पर पीछे बैठा बृजेश फायरिंग करने लगा।
- फोटो : एआई
शव परिजनों को सौंपा, पूर्व विधायक ने हत्या का आरोप लगाया
रविवार की देर रात नक्सली कमांडर बृजेश का भाई सुरेश गंझू वाराणसी पहुंचा। पोस्टमार्टम के बाद जांच एजेंसी की मौजूदगी में बृजेश् का शव उसके भाई और भांजे को सौंप दिया। पहले परिजन वाराणसी के मणिकर्णिका पर उसके दाह संस्कार की तैयारी में थे लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
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एटीएस को देखते ही बाइक पर पीछे बैठा बृजेश फायरिंग करने लगा।
- फोटो : एआई
बाद में सब उसके शव लेकर झारखंड के चतारा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के लुट्टू गांव के लिए रवाना हो गए। उधर, नक्सली कमांडर के भाई और पूर्व विधायक गणेश गंझू ने बृजेश करी हत्या किए जाने का आरोप लगाया। बृजेश की मां, पत्नी, बहन, दो बच्चे और अन्य सदस्य हैं।
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एटीएस ने रविवार को तड़के सोनभद्र-मिर्जापुर रूट से आ रहे बाइक सवार को रोका।
- फोटो : एआई
नक्सली बृजेश और एटीएस के बीच 14 राउंड हुई थी फायरिंग
मुठभेड़ में ढेर नक्सली बृजेश गंझू और एटीएस के बीच 14 राउंड फायरिंग हुई थी। 30 लाख के इनामी के आने की सूचना पर एटीएस की गोरखपुर यूनिट भी सक्रिय हुई थी। वाराणसी और गोरखपुर यूनिट ने मिलकर नक्सली और उसके साथी को लंका मैदान के पास घेरा था। पुलिस से घिरता देख बाइक से कूदने के बाद बृजेश गंझू ने .30 और .32 बोर की पिस्टल से तीन राउंड फायरिंग की थी।
जवाबी कार्रवाई में एटीएस ने ताबड़तोड़ 11 राउंड फायरिंग की थी। इसमें नक्सली बृजेश गंझू ढेर हो गया था। एटीएस के अधिकारियों के अनुसार लंका मैदान के पास एटीएस उपाधीक्षक विपिन राय, गोरखपुर यूनिट के निरीक्षक विजय प्रताप सिंह और वाराणसी यूनिट के भारत भूषण तिवारी समेत पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी की थी। वहीं, भागे हुए युवक के बारे में भी पुलिस समेत अन्य टीमें जांच कर रही है।