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सरगम के मोती संग नृत्य की बहार, भक्ति से सराबोर हुआ माहौल

Sun, 22 Jul 2018 12:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
नृत्य के माध्यम से ही ईश्वर व गुरु के ज्योतिर्मय स्वरूप का वंदन कर पूरा माहौल ही भक्ति से सराबोर कर दिया। जो भी था भक्ति में लीन हो गया और ऐसा लग रहा था जैसे पूरा हाल ही साधना में मंत्रमुग्ध हो। यह माहौल देखने को मिला बनारस के नवसाधना कला केंद्र के सत्रारंभ में कला साधकों द्वारा प्रस्तुत की गई संगीतमयी साधना में। शनिवार को कला केंद्र के सत्रारंभ कार्यक्रम के दौरान नव प्रवेशी साधकों ने ऐसी प्रस्तुतियां दीं, जिससे बड़े-बड़े धुरधंर भी देखकर दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
समारोह की शुरुआत राग धानी में भजन तेरी महिमा नित गाऊं, हे प्रभु वर दे...से हुई। अगली कड़ी में कलासाधकों ने राग असावरी थाट में बड़ा ख्याल, छोटा ख्याल, धमार तीन ताल में पारंपरिक रचना प्रस्तुत की। ‘अरे मन समझ-समझ पग धरिए’ बंदिश के बोलो को शेरीन, रबिता, निधि, रजनी, लिली, राहुल, दीपक, चरण, और अक्षत ने अपने स्वर दिए। बीपीए द्वितीय तृतीय वर्ष के कलासाधकों ने राग चतुस्वरम् ताल आदि में अलारिपु और राग मोहनम व ताल आदि पुष्पांजलि नृत्य प्रस्तुत कर सभी को मुग्ध कर दिया। नृत्यांगनाओं में पूजा रानी, जयंती, अरुण, पूर्णमया आदि ने ईश्वर को पुष्प अर्पण कर भावांजलि दी। 

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
बीपीए व एमपीए के कला साधक लुविजा, प्रिया, नेहा राज, नैंसी, अपराजिता, ओलरिका आदि ने राग केदार और ताल में कीर्तनम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। पापनाशम रमैया शिवन के संगीत की लय पर कला साधिकाओं का पद संचलन और विविध मुद्राएं अनोखा दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं। इसके बाद बीपीए द्वितीय और तृतीय वर्ष के कलासाधक लोक नृत्य लावणी को लेकर मंच पर आए तो माहौल थिरकन से सराबोर हो गया। सलमा, प्रिया, नेहा, रोज, अर्चना, रेखा, शेली, उर्मिला, अनुपमा, सुरभि और पायल ने ‘जिंग जिंग झिंगात’ के बोलो पर जोरदार प्रस्तुति दी। 

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर आयुक्त महेंद्र कुमार राय ने कहा कि संगीत और नृत्य कला साधना से सशक्त होती है और संगीत के स्वर हमारे हृदय में बसते हैं। युवा पीढ़ी शास्त्रीय संगीत और नृत्य विधा को अपना रही है। विशिष्ट अतिथि सिस्टर ऐनी डिसूजा व डॉ. रामसुधार सिंह ने कलासाधकों को आंतरिक शक्ति को विकसित करने के टिप्स दिए। मुख्य अतिथि व प्राचार्य डॉ. फादर विल्फ्रेड मोरस ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। 
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