अपराजिता संवाद में विचार व्यक्त करतीं काशी की बेटियां
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हमारा समाज केवल लड़कियों को सिखाता है, लड़कों को भी संस्कार देने की जरूरत है। लड़कों की समय-समय पर काउंसलिंग हो ताकि समाज में ऐसी घटनाएं न हों।
नेहा वर्मा, छात्रा, विद्यापीठ
जिस तरह जीएसटी, नोटबंदी, का कानून रातों रात पास कर दिया गया था, क्या इसी तरह दुष्कर्म जैसे अपराध करने वालों को कानून जल्द से जल्द सजा नहीं दे सकता।
संगम वर्मा, राष्ट्रीय हॉकी प्लेयर
घटना के बाद लड़की को न्याय मिलने में इतना समय लग जाता है, कि न्याय मिलने की आस टूट जाती है। इस तरह के मामलों में कानून को जल्द से जल्द फैसला देना चाहिए।
डॉ. दीक्षा सिंह
बालिकाओं के साथ अपराध रोकने के लिए मोमबत्ती जलाने से काम नहीं चलेगा। अब ठोस कदम उठाते हुए सजा सुनाने में शासन और प्रशासन को देर नहीं करनी चाहिए।
श्रुति सिंह, छात्रा, शेपा कॉलेज
इस तरह के घटनाओं में शामिल अपराधियों को सजा मिलने में देर नहीं होनी चाहिए। मोमबत्तियां जलाने और शोक सभा नहीं, अपराधियों को सजा देने की जरूरत है।
ज्योति सिंह कराटे खिलाड़ी
समाज में जो घटनाएं हो रही हैं, उससे हमें सबक लेते हुए खुद को मजबूत करने की जरूरत है। अगर हम खुद मजबूत होंगे तो अपराधियों को मुंहतोड़ जवाब दे सकेंगे।
चेतना, शिक्षिका, सिल्वर ग्रोव स्कूल
इस तरह के अपराध के लिए सरकार और कानून को त्वरित न्याय का प्रावधान बनाना चाहिए। जो आने वाले समय में दूसरे अपराधियों के लिए सबक बन सके।
तनिष्का जायसवाल, शिक्षिका
गलत के खिलाफ हमें खुद ही खड़ा होना होगा। लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून बनने के साथ हमें भी आत्मरक्षा के गुर भी सीखने होंगे।
दिव्या पांडेय, कराटे खिलाड़ी
इस तरह की घटनाओं में पुलिस की भूमिका भी अहम होती है, जिसे उसे निभाना चाहिए। हमें अब एक ऐसे कानून की जरूरत है, जो अपराधियों में डर पैदा करें।
आयुषी, ट्रेनी, फोरेंसिक सांइस
अब ऐसा फैसला आए जो अपराधिकयों के लिए नजीर बने। जहां भी गलत हो रहा है, वहां हमें खुद अपनी आवाज बुलंद कर उसके खिलाफ खड़ा होना बेहद जरूरी है।
पिंकी, रेडियो जॉकी