जरायम जगत के कुख्यात नाम और मुंबई अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन रखने वाले मुन्ना बजरंगी की हत्या बागपत जेल में उसी के अंदाज में की गई। बजरंगी और उसका गिरोह एके-47 और नाइन एमएम की पिस्टल जैसे अत्याधुनिक असलहों से अंधाधुंध गोलियां बरसा कर सुबह-सुबह हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए कुख्यात रहा है। बजरंगी के अंदाज में ही बागपत जेल में सोमवार की सुबह उस पर पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी गई। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल में जेल में हत्या की शुरुआत बजरंगी ने कराई थी। जिला जेल के गेट पर बजरंगी के इशारे पर उसके खास शूटर अन्नू त्रिपाठी ने मार्च, 2004 में बंशी यादव की गोली मार कर हत्या की। इसके लगभग एक साल बाद 12 मई 2005 को सेंट्रल जेल की बैरक में अन्नू की हत्या किट्टू गुप्ता ने गोली मार की। बताया जाता है कि बजरंगी अपने बाकी शूटरों की अपेक्षा अन्नू को खास तरजीह देता था। अन्नू की जैसे हत्या की गई थी ठीक उसी अंदाज में बागपत जेल में बजरंगी को मार डाला गया।
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जिला जेल के गेट पर पार्षद बंशी यादव की हत्या बजरंगी के इशारे पर मार्च, 2004 में उसके शार्प शूटर अन्नू त्रिपाठी ने सुबह गोली मार कर की थी। 2008 से पहले बनारस से गाजीपुर जाते समय चंद्रावती के समीप बाले सिंह, कोतवाली क्षेत्र में बंटी सिंह और गाजीपुर के सैदपुर में अनिल सिंह की हत्या सुबह के समय की गई और तीनों वारदातों में बजरंगी का नाम सामने आया। 2000 से पहले मिर्जापुर रेलवे स्टेशन के सामने भीम सिंह की गोली मार कर की गई हत्या के मामले में भी बजरंगी का नाम सामने आया। हाल के वर्षों में 23 नवंबर 2013 की सुबह जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या भोजूबीर क्षेत्र में बजरंगी के गुर्गों ने उसी के अंदाज में की।
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1997 में छात्रनेता सुनील राय की हत्या के बाद दिसंबर, 2002 में मलदहिया चौराहा के समीप उनके भाई छात्रनेता रहे अनिल राय की हत्या सुबह-सुबह की गई थी। वारदात की साजिश बजरंगी ने रच कर एके-47 और नाइन एमएम की पिस्टल उपलब्ध कराई। वहीं, फायरिंग बजरंगी के शूटर अफरोज बंटी और अनुराग सिंह उर्फ मोनू ने की। इसके बाद 25 मई, 2002 को चेतगंज थाना अंतर्गत सेनपुरा निवासी व्यवसायी लक्ष्मण सेठ के घर पर अलसुबह बदमाशों ने फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी। इसकी भी साजिश रचने का आरोप बजरंगी पर रहा और शूटर भी उसी के थे।
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सेंट्रल जेल में ही सितंबर, 2005 में महेंद्र महतो का शव बैरक के शौचालय में लटका मिला था। फरवरी, 2007 में बंदी सर्वेश सिंह की सेंट्रल जेल में संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सर्वेश का गला दबाकर हत्या की गई थी। फरवरी, 2007 में सेंट्रल जेल में पिटाई से क्षुब्ध बंदी शिव कुमार यादव ने आत्मदाह का प्रयास किया था।
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मुन्ना बजरंगी और उसके गिरोह के खास सिपहसालारों का खात्मा बेहद ही सुनियोजित तरीके से किया गया। मार्च, 2016 में बजरंगी के साले और उसका दायां हाथ कहलाने वाले पुष्पजीत सिंह उर्फ पीजे की हत्या लखनऊ मेें कर दी गई थी। इसके बाद दिसंबर, 2017 में विश्वेश्वरगंज निवासी ठेेकेदार और बजरंगी गिरोह का अर्थतंत्र संभालने वाले मोहम्मद तारिक की भी हत्या लखनऊ में कर दी गई। दोनों की हत्या किसने की, इसे लेकर अब तक राज बरकरार है।
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अंतरराज्यीय गैंग नंबर 233 का सरगना प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी 36 साल से जरायम जगत का कुख्यात नाम था। हत्या और रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात बजरंगी की हनक पूर्वांचल के साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों और नई दिल्ली के अलावा मुंबई के अंडरवर्ल्ड जगत में भी थी। जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों और नई दिल्ली में मौजूदा समय में बजरंगी के खिलाफ हत्या, रंगदारी सहित अन्य आरोपों में 28 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से कुछ मुकदमों से निचली अदालत से बजरंगी बरी भी हो गया था।
पूर्वांचल के लोगों को पहली बार एके-47 की से निकली गोलियों की तड़तड़ाहट मुन्ना बजरंगी ने सुनाई थी। पुलिस डोजियर के अनुसार मुन्ना बजरंगी और उसकी गैंग के बदमाश एके-47 / एके-56, नाइन एमएम और .30 बोर की पिस्टल से हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। इस समय गैंग के सदस्यों के पास मौजूद असलहों की सटीक जानकारी पुलिस और एसटीएफ को भी नहीं है।