मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद यूपी के साथ ही आसपास के अन्य राज्यों में जरायम जगत में खासी हनक रखने वाले इस गैंग को चलाने को लेकर पश्चिम से पूरब तक चर्चा हो रही है। जरायम से जुड़े लोग और पुलिस अधिकारी मुन्ना बजरंगी गैंग के खात्मा हो जाने को लेकर अटकलें लगा रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
उन लोगों का कहना है कि मुन्ना बजरंगी गैंग का हश्र भी माफिया डॉन श्री प्रकाश शुक्ला गैंग जैसे ही होगा। कुछ स्थितियां दोनों की एक जैसी हैं। सीएम की सुपारी लेने के बाद एसटीएफ ने सितंबर 1998 में श्री प्रकाश शुक्ला को मार गिराया। ठीक उसकी तरह मुन्ना बजरंगी भी कुछ सफेदपोशों को मारने की प्लानिंग बना चुका था। अगर उसके शूटर बिहार में नहीं पकड़ जाते तो हमला तय था।
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वर्ष 1990 से लेकर 1998 तक पूरे यूपी में श्री प्रकाश का और 1995 से लेकर 2018 तक मुन्ना बजरंगी का आतंक ऐसा रहा जिसके आगे कोई भी बदमाश टक्कर लेने की नहीं सोच पाया। श्री प्रकाश के मरने के बाद पूरी गैंग तितर बितर हो गया। ठीक उसी तरह मुन्ना गैंग का भी हश्र होना तय माना जा रहा है। मुन्ना बजरंगी के पास भी ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो कमान संभाल सके। जिन नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं। उनसे मुन्ना के दूर-दूर के रिश्ते नहीं थे।
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munna bajrangi
मुन्ना बजरंगी की जेल में हुई हत्या के बाद पूरे प्रदेश की जेलों में बंद बड़े अपराधियों में खलबली मची है। मुन्ना गिरोह के शूटर प्रतिशोध में हैं जरूर लेकिन जेल में होने की वजह से वह छटपटा रहे हैं। जो बाहर लोग हैं वह पूरी तरह से कामर्शियल हैं। अब मुन्ना की हत्या के बाद अपने को अलग कर किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहते। इसमें जौनपुर के कुछ नाम भी शामिल हैं।
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ और पुलिस के बड़े अधिकारियों की मानें तो बिहार में नीरज सिंह की हत्या में गिरफ्तार मुन्ना बजरंगी गिरोह के बदमाशों से कुछ इनपुट मिला था। उसके मुताबिक जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह की हत्या की सुपारी कुछ बदमाशों को दी गई थी। धनंजय के करीबी लोग भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। इनपुट मिलने के बाद एसटीएफ अलर्ट हो गई थी।
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
वैसे भी मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत उर्फ पीजे सिंह और करीबी तारिक की हत्या के बाद पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर साजिश का आरोप मुन्ना की पत्नी इस विवाद को पुष्ट कर चुकी है। जो भी हो श्री प्रकाश शुक्ला फरवरी 1998 में पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी को मारने की प्लानिंग तैयार कर रहा था। यह भनक हरिशंकर तिवारी को लग गई। उन्होंने इस मामले को दूसरी तरफ मोड़ दिया।
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बाद में यह बात चर्चा में आ गई कि श्री प्रकाश शुक्ला ने तत्कालीन मुख्यमंत्री को मारने की सुपारी ली है। इसी के बाद अप्रैल 1998 में पहली बार एसटीएफ गठित की गई और उसका लक्ष्य श्री प्रकाश का खात्मा था। क्योंकि 13 जून 1998 को श्री प्रकाश और उसके मित्रों ने बिहार के मंत्री बृज बिहारी की हत्या कर अपनी ताकत का एहसास करा दिया था। इसी वजह से पूरी सरकार भयभीत हो गई और 23 सितंबर 1998 को मुठभेड़ में एसटीएफ ने श्री प्रकाश शुक्ला को मार गिराया।
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Munna Bajrangi
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मुन्ना बजरंगी का आतंक भी पूरे प्रदेश में था जरूर लेकिन चौराहे छाप अपराधियों की संख्या गिरोह में अधिक थी। दो एक को छोड़ दिया जाए तो गिरोह में कोई खास शूटर अब नहीं बचा है। जो भी घटनाएं हुई मुन्ना ने स्वयं की। उनके शूटर उतनी बड़ी घटनाओं को अंजाम नहीं दे पाए जितना मुन्ना ने करके दहशत पैदा की थी। एसटीएफ और पुलिस के अधिकारी और अपराध जगत से जुड़े लोग मान रहे हैं श्री प्रकाश गैंग जैसे ही मुन्ना बजरंगी गैंग का हश्र होना तय है।
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मुन्ना बजरंगी की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
उधर, झांसी जेल में बंद मुन्ना बजरंगी पर हमले की भनक झांसी प्रशासन को लग गई थी। प्रशासन ने मुन्ना से मिलने जुलने वालों पर शिकंजा कसना शुरू दिया तो प्रतापगढ़ और जौनपुर के कई नेता, प्रदेश के अधिकारियों की सिफारिश होने लगी। जौनपुर के एक विधायक ने प्रदेश के एक मंत्री से सिफारिश की कि झांसी जिले का प्रशासन मुन्ना बजरंगी को परेशान कर रहा है। मंत्री ने जब डीएम एसपी से पूछा कि सच्चाई क्या है तो उन्होंने बताया कि अगर सख्ती नहीं की जाएगी तो मुन्ना बजरंगी पर हमला जेल में ही हो जाएगा।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि ऐसा इनपुट उन्हें खुफिया एजेंसियों से मिला है। इसके बाद मंत्री ने अपनी बात वापस ले ली और विधायक को ऐसे लोगों की सिफारिश भविष्य में नहीं करने की चेतावनी दी। पैरवी करने वाले विधायक मुन्ना बजरंगी के हत्या के बाद न तो उसके घर दिखे और न ही अंतिम संस्कार में ही शामिल हुए। वैसे भाजपा के इस विधायक के रिश्ते मुन्ना से जग जाहिर हैं। एसटीएफ विधायक और मुन्ना बजरंगी के रिश्ते की पड़ताल कर रही है।