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एक था मुन्ना बजरंगीः 36 साल का साम्राज्य मात्र 28 माह में दरका, एक-एक मारे गए गुर्गे

Sat, 14 Jul 2018 10:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
साढ़े तीन दशक से ज्यादा समय यानी लगभग 36 साल तक पूर्वांचल सहित प्रदेश और आसपास के प्रदेशों में आतंक का पर्याय बने मुन्ना बजरंगी का किला ध्वस्त होने में महज 28 महीने का समय लगा। शुरुआत मार्च 2016 को हुई थी, जब बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह उर्फ पीजे की लखनऊ में हत्या की गई। दिसंबर 2017 में उसके करीबी मोहम्मद तारिक की हत्या और अब बजरंगी की हत्या से जरायम जगत में इस गिरोह की जड़ें उखड़ गई हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
जेल की सलाखों के पीछे बजरंगी की हत्या की साजिश रची जा रही है, इसकी आहट तकरीबन महीने भर पहले ही झांसी जेल प्रशासन के अधिकारियों और खुद बजरंगी गिरोह को लग गई थी। झांसी जेल में बजरंगी से मुलाकात करने जाने वालों पर बढ़ती सख्ती से इसके संकेत भी मिलने लगे थे कि बजरंगी सलाखों के पीछे भी सुरक्षित नहीं है। 

 
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munna bajrangi
मुन्ना बजरंगी के संपर्क में रहने वालों का कहना है कि कुछ महीने पहले से ही जेल और पुलिस ने उसकी निगरानी बढ़ा दी थी। खासकर पिछले महीने भर से झांसी जेल में बजरंगी से मुलाकात करने जाने वालों से कड़ाई से पूछताछ की जाती थी। कुछ सफेदपोशों ने तब इस पर आपत्ति जताई थी तो प्रशासनिक अधिकारियों ने खुफिया इनपुट का हवाला दिया था। ऐसे में जिस तरह वारदात हुई और अब तक की कहानी में लगातार नई कड़ियां जुड़ती जा रही हैं, उससे कई तरह की चर्चाएं लोगों की जुबान पर हैं। 

 

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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
मुन्ना बजरंगी के अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने शुक्रवार को मोबाइल से हुई बातचीत में लखनऊ से कहा कि पूरे प्रकरण में इतना झोल है कि क्या कहा जाए। झांसी जेल से बागपत जेल ले जाने के दौरान मुन्ना के साथ बच्चा रोग विशेषज्ञ और बेहोशी विशेषज्ञ चिकित्सक थे जबकि उन्हें बीमारी शुगर, हार्ट और हड्डियों से संबंधित थी। जेल में असलहा कैसे पहुंचा और मुन्ना की हत्या कैसे हुई, इसकी सीबीआई जांच होगी तभी मामला परत दर परत सुलझेगा।

 
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
उधर, कभी बजरंगी के करीबी होने का दंभ भरने वाले बनारस सहित पूर्वांचल के अन्य जिलों के चिह्नित लोग उसकी हत्या के बाद भूमिगत से हो गए हैं। हालत यह है कि कुछ ने तो अपना पुराना मोबाइल नंबर भी बदल दिया है और नया नंबर सार्वजनिक करने से कतरा रहे हैं। वहीं, जरायम जगत से अर्जित काली कमाई बजरंगी ने जिन बिल्डरों के माध्यम से रियल इस्टेट क्षेत्र में लगाई थी वो उसे डकारने की जुगत में जुट गए हैं। 

 
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मुन्ना बजरंगी - फोटो : अमर उजाला
हालांकि बजरंगी गिरोह को करीब से जानने वालों का कहना है कि उसका पैसा पचा पाना आसान नहीं है और कोई कितना भी कन्नी काट ले लेकिन हिसाब तो करना ही पड़ेगा। बता दें कि बनारस सहित पूर्वांचल के अन्य प्रमुख शहरों में बजरंगी ने अपने करीबी बिल्डरों के माध्यम से रियल इस्टेट क्षेत्र में करोड़ों रुपये का निवेश किया था।
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