लंबे अरसे बाद गुरुवार को वाराणसी और जौनपुर आए समाजवादी पार्टी के संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पूर्वांचल में सपा की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी। जौनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कुछ ऐसा कहा जिससे अखिलेश के नेताओं के चेहरे पर मायूसी छा गई। वहीं वाराणसी में भले ही राजनीति से दूरी बनाए रखी, मगर ढाई घंटे से ज्यादा समय में उन्होंने यहां से राजनीतिक संदेश दिया। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी गुरुवार को पूर्वांचल में थे। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी आए पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने गुरुवार को भले ही राजनीति से दूरी बनाए रखी, मगर ढाई घंटे से ज्यादा समय में उन्होंने यहां से राजनीतिक संदेश दिया। उनके पूरे कार्यक्रम के दौरान सपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय रहे। जबकि भाई शिवपाल सिंह यादव की नवगठित प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने दूरी बनाए रखी। एयरपोर्ट पर पूर्व रक्षा मंत्री ने सपाइयों को चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा तो वैद्य पं. शिवकुमार शास्त्री के परिजनों से अपने को स्वस्थ्य करने के लिए कहकर राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाने का संकेत दिया।
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मुलायम सिंह यादव को लेकर समाजवादी पार्टी और उससे अलग हुई प्रगतिशील समाजवादी पार्टी में लंबे समय से घमासान चल रहा है। हालांकि मुलायम समय समय पर अलग अलग मंचों पर मौजूद रहकर अपने समर्थकों को संदेश देते रहे हैं। बुधवार को वाराणसी दौरे में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की दूरी और सपाइयों की सक्रियता भी सियासी संदेश गया।
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मुलायम सिंह यादव गुरुवार को जौनपुर में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव को बार-बार जीताने की अपील कर सपा की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी। इस तरीके से बार-बार लोकसभा चुनाव और पारसनाथ यादव को जीताने के लिए जनसमूह से हाथ उठाकर हां में हां मिलवाया, उससे यही संकेत जा रहा है कि पारसनाथ यादव को लोकसभा चुनाव 2019 में लड़ने की हरी झंडी मुलायम की तरफ से दे दी गई है।
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पूर्व ब्लाक हीरावती देवी के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में श्रीराम पीजी कालेज आदमपुर निगोह में आए मुलायम सिंह यादव का पूरा भाषण पारस पर ही केंद्रित रहा। उन्होंने चार बार पारस का नाम लिया। अपनी उनके साथ नजदीकी का बखान किया और टिकट पक्का करने का संकेत दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मंशा क्या है यह तो वहीं बताएंगे, लेकिन उनके पिता ने जिले में राजनीतिक पारा बढ़ा दी है। अन्य दलों में भी खलबली मच गई है कि पारसनाथ यादव चुनाव लड़ सकते हैं। पारसनाथ यादव कई बार विधायक, दो बार सांसद रह चुके हैं।
सपा बसपा समझौता होने के बाद जिले की दो लोकसभा सीट में एक सपा की झोली में जानी तय है। ऐसे में पारसनाथ कहां से चुनाव लड़ते हैं, यह तो समय बताएगा। वैसे सपा में अखिलेश के कई करीबी लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस बार जौनपुर और मछलीशहर दोनों सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इस मसले पर बोलने के लिए सपा का कोई दिग्गज तैयार नहीं है। खुद पारसनाथ भी मौन साधे हुए हैं। वह यह कह रहे हैं कि नेताजी का जो भी आदेश होगा उसे माना जाएगा।