संस्कृत, संस्कृति, धर्म, कला और संगीत की नगरी काशी की धरती पर उतरते ही प्रवासी भारतीयों ने चरण रज अपने माथे से लगाई और नमन किया। हर प्रवासी अपने पारंपरिक स्वागत से अभिभूत और अपनी धरती की मिट्टी की खूशबू को नजदीक से महसूस कर रहा था। उनकी आंखें भी नम हो उठीं। बाबतपुर एयरपोर्ट पर शनिवार को उत्सव सरीखा नजारा था। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
प्रवासियों के आने का सिलसिला सुबह से देर शाम तक जारी रहा। काशी आने वाले मेहमानों का स्वागत फूलों की बरसात और माला पहनाकर किया गया। शनिवार को प्रवासी भारतीय दिवस में भाग लेने के लिए चार सौ प्रवासी काशी पहुंचे। इसमें सबसे अधिक संख्या मॉरीशस से आने वाले प्रवासी भारतीयों की थी।
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मॉरीशस से आए रामनाथ अपने 20 सदस्यीय दल के साथ जैसे बाबतपुर एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उन्होंने काशी की धरती को नमन किया और यहां की रज को अपने माथे से लगाया। उनके साथ आए सभी सदस्यों ने भी उनका अनुसरण किया। रामनाथ ने बताया कि वह दूसरी बार काशी आ रहे हैं। भारत अब पूरी तरह से बदल रहा है। काशी का यह नया स्वरूप देखकर मन प्रसन्न हो गया।
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अमेरिका से आए व्यवसायी श्रेयश गुलाटी एवं उनकी पत्नी रूपल का कहना था कि काशी के बारे में तो बहुत सुना था लेकिन इस बार काशी को बेहद नजदीक से जानने का अवसर मिला है। हमारा प्रयास होगा कि हम काशी के विकास में योगदान दे सकें।
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सुबह से ही विभिन्न विमानों से सैकड़ों प्रवासी मेहमान एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पहुंचते ही एयरपोर्ट टर्मिनल बिल्डिंग के आगमन हाल में स्कूली छात्रों द्वारा पहले चन्दन लगाया जाता है फिर उनकी आरती करने के बाद माल्यार्पण किया जा रहा है। उसके बाद मेहमानों को आदरपूर्वक हेल्पडेस्क तक लाया गया। रजिस्ट्रेशन नंबर पूछकर उनके रहने और वाहन की व्यवस्था जाचंने के बाद उन्हें कार में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
प्रवासी मेहमानों के अगवानी के लिए सुबह 8 बजे से ही एसडीएम पिण्डरा, सीओ पिण्डरा, एयरपोर्ट निदेशक, सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट सहित एयरपोर्ट के अन्य अधिकारी लगे रहे। वहीं शाम को डीएम और एसएसपी भी एयरपोर्ट पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।