बीएचयू के पूर्व कुलपति, देश के ख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह सोमवार की देर शाम मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी। लालजी सिंह का पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित था। लालजी सिंह के बीएचयू के कार्यकाल के दौरान व उनके जीवन से जुड़ी कुछ यादगार झलकियां उनके व्यक्तित्व को बंया करती हैं। आगे की स्लाइड्स देखें...
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bhu former vc lalji singh
डॉ. लालजी सिंह की प्रारंभिक शिक्षा शेरवा इंटर कॉलेज प्रतापगंज में हुई। बीएचयू से परास्नातक करने के बाद बायो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विश्व में जौनपुर के साथ देश का नाम रोशन किया। उनके दोनों पुत्रों की प्रारंभिक से लेकर उच्च शिक्षा लंदन में हुई। बड़े बेटे अभिषेक हैदराबाद में अब्या कम्यूनिकेशन के स्टेट हेड हैं जबकि छोटे पुत्र प्रवीन यूके स्थित एडीनबर्ग यूनिवर्सिटी में जूनियर साइंटिस्ट हैं।
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बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह का अंतिम दम तक गांव से बेहद लगाव था। वह गांव के विकास और यहां के युवकों को दिशा देने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। ग्रामीण परिवेश में पल-बढ़ कर उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच ऊंचाइयां तय कीं, जो नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है। कलवारी में जन्मे डॉ. सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा घर रहकर पूरी की। बीएचयू से बीएससी तथा एमएससी में गोल्ड मेडलिस्ट रहे।
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1966 में जूलॉजी में जेआरएफ तथा सीआरएफ़ करने पर सीएसआईआर ने 1972 में साईटो जेनेटिक क्षेत्र में पुरस्कृत किया। दो साल तक सांप के जहर पर शोध के बाद बीएचयू में एसोसिएट प्रोफेसर रहे। इसके बाद कोलकाता यूनिवर्सिटी में पूल आफिसर बनाए गए। यूके स्थित एडनबर्ग यूनिवर्सिटी में 1977 से 1987 तक वैज्ञानिक के रूप में डीएनए फिंगर प्रिंट पर शोध किया।
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इंटरनेशनल एकेडमी की ओर से 1974 में उन्हें मेडल फार यंग साइंटिस्ट मिला। वैसे तो उन्हें मिलने वाले सम्मान, उपाधियां और पुरस्कार बहुत हैं लेकिन कुछ महत्वपूर्ण पुरस्कारों पर गौर करें तो भारत सरकार ने शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उनको पद्मश्री से नवाजा। रेन बैक्सी एवार्ड, सनआफ स्वायल, भटनागर फेलोशिप के साथ कई विश्वविद्यालयों ने डीलिट् की उपाधि दी।
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देश प्रेम के जज्बे के चलते डॉ. सिंह यूके से मिलने वाले अच्छे वेतन भत्ते को ठुकराकर अपने देश आ गए और हैदराबाद में पहले सेंटर फॉर डीएनए फिंगर प्रिंटिंग एंड डाइग्नास्टिक्स (सीडीएफडी) और बाद में सेंटर फॉर सेलुलर मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) में निदेशक के रूप में बेहतर सेवाएं दीं। जन्माष्टमी के दिन वर्ष 2014 में बीएचयू के कुलपति का कार्यभार संभाला।
गांव के प्रति लगाव के चलते उन्होंने कलवारी में 2001 में राहुल पीजी कॉलेज, 2004 में उच्च कोटि की सुविधाओं से लैस जीनोम फाउंडेशन की स्थापना की। पूर्व कुलपति डॉ. लालजी का जीवन समाज के लिए समर्पित था। परिवार के सदस्य हों या रिश्तेदार, उनके सुख-दुख के आगे उन्होंने कभी अपनी परवाह नहीं की।