यौम-ए-आशूरा पर शुक्रवार को शहर से लेकर गांव तक या हुसैन..., हुसैनियत जिंदाबाद..., यजीदियत मुर्दाबाद... की सदाएं बुलंद हुईं। हर गली-मोहल्लों और गांवों से ताजियों का जुलूस निकला। अकीदतमंदों ने इसकी जियारत कर इमाम हुसैन और उनके 71 सार्थियों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। सुन्नी जमात ने शहादतनामा पढ़ा और आशूरे की दुआ मांगी तो शिया जमात ने जुलूस निकालकर जंजीर और कमा का मातम किया। शहर भर से उठे ताजिये कर्बला बने लाट सरैया इमामबाड़े और फातमान दरगाह में दफन किए गए।
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वाराणसी में ताजिये का जुलूस
- फोटो : रोहित सोनकर
मुहर्रम की दसवीं तारीख यानी शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद ताजियों का जुलूस निकलना शुरू हुआ। तय वक्त के साथ हर ताजिये अपने कदीमी रास्तों से होकर कर्बला तक पहुंचे। ताजिये के साथ अलम और तिरंगा भी लहरा रहा था। फन-ए-सिपहगिरी का करतब दिखाते युवा चल रहे थे। दालमंडी से पीतल के ताजिया की अगुवाई में मोमिन या हुसैन... की सदा बुलंद करते हुए निकले।
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वाराणसी में ताजिये का जुलूस
- फोटो : रोहित सोनकर
लल्लापुरा के रांगे का ताजिया भी रवायत को कायम करते हुए आगे बढ़ा। दोनों ताजिये दरगाहे फातमान पहुंचकर दफन हुए। बाकराबाद के बुर्राक का ताजिया, उल्फत बीबी के हाते का जरी का ताजिया, कोयला बाजार के नगीने का ताजिया, मजीद पहलवान कमेटी का फूलों का ताजिया, गौरीगंज के शीशम का ताजिया, चपरखट का ताजिया, शिवाला में कुम्हार का ताजिया, दोषीपुरा का शाबान का ताजिया, बजरडीहा के कागज के ताजिया के अलावा सैकड़ों मन्नती ताजिये दरगाहे फातमान, सरैया और शिवाला इमामबाड़े में दफन किए गए।
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वाराणसी में ताजिये का जुलूस
- फोटो : रोहित सोनकर
26 अंजुमनों ने किया जंजीर और कमा का मातम
शहर की तकरीबन 26 अंजुमनों ने अलम, तुर्बत औ दुलदुल के जुलूस उठाए जो देर शाम दालमंडी, शिवपुर, शिवाला, दोषपुरा, पितरकुंडा और भेलूपुर आदि इलाकों से गुजरा। अजादारों ने जंजीर और कमा के मातम के साथ आंसुओं का नजराना पेश किया। उधर, अंजुमन हैदरी गश्ती अलम लेकर दरगाहे फातमान पहुंची, जहां भोर में अजादारों ने दहकते अंगारों पर चलकर मातम किया।
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वाराणसी में ताजिये का जुलूस
- फोटो : रोहित सोनकर
पहली बार लाटसरैया इमामबाड़े जाने का मार्ग बदला
पहली बार लाट सरैया जाने वाले ताजियों के जुलूस का मार्ग बदला। लाट सरैया जाने वाले सभी ताजिये लाटभैरव ओवरब्रिज से होकर सरैया इमामबाड़े पहुंच रहे थे। ताजियेदार आधा किमी से अधिक लंबे ओवरब्रिज से ताजिये लेकर चल रहे थे, जो सरैया पुलिस चौकी पर उतरकर इमामबाड़े पहुंच रहे थे। हालांकि कुछ ताजियेदारों ने इसे लेकर नाराजगी जताई।
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वाराणसी में ताजिये का जुलूस
- फोटो : अमर उजाला
अकीदतमंदों को पिलाया पानी और शर्बत
ताजिये के जुलूस के दौरान पितरकुंडा पोखरे के पास जिया क्लब ने स्टाॅल लगाकर जुलूस में शामिल अकीदतमंदों को पानी और शर्बत पिलाया। अन्य संस्थाएं और समाजसेवियों ने भी अलग अलग जगहों पर स्टाॅल लगाकर जुलूसों में शामिल लोगों में पानी, शर्बत, खिचड़ा और रोजा इफ्तार की सामग्री वितरित की।
जलसे व मजलिस में किया शहादत को बयां
सुन्नी हजरात ने जलसे और शिया हजरात ने मजलिसों के जरिये कर्बला के शहीदों को याद किया। नातिया कलाम से खिराज-ए-अकीदत पेश की। देर रात तक उलेमाओं ने कर्बला की शहादत को बयां की। उन्होंने कर्बला के मैदान में शहीद हुए इमाम हुसैन सहित 72 शहीदों की शहादत को दुनिया याद करती है। इन शहीदों ने इंसानियत और इस्लाम की हिफाजत की। मजलिसों में अंजुमनों ने नौहा व मातम पेश किया। शिया हजरात ने शाम-ए-गरीबां की मजलिस कर अकीदत पेश की।