मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री और चंदौली के सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद राजनाथ सिंह के रूप में देश को गृह मंत्री देने वाले चंदौली एक और राजनेता विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में शामिल हो गया है। आगे की स्लाइड्स में जानिए उनके बारे में..
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महेन्द्र नाथ पांडेय
- फोटो : SELF
लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के लिए किए गए कार्यों की बदौलत ही बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति का ककहरा सीखने वाले डॉ. पांडेय भाजपा में यूपी के शीर्ष पद पर नियुक्त किए गए हैं।
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डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
आपातकाल के दौरान उन्हें डीआईआर के तहत पांच माह के लिए जेल में डाल दिया गया था। राम जन्मभूमि आंदोलन में मुलायम सिंह यादव की सरकार में इन्हें रासुका में भी निरुद्ध किया गया था। पार्टी संगठन में वह काशी क्षेत्र के अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं।
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मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
गाजीपुर के पखनपुर गांव निवासी डॉ. पांडेय का जन्म 15 अक्तूबर, 1957 को हुआ था। आरएसएस से उनका जुड़ाव शुरू में ही हो गया था।1973 में वह सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए थे। 1977 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक बनाए गए। 1978 में बीएचयू छात्र संघ के महामंत्री बने। उन्होंने बीएचयू से हिंदी में पीएचडी के साथ-साथ पत्रकारिता में परास्नातक किया है।
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mahendra nath
- फोटो : अमर उजाला
1980 में भाजपा की टिकट पर उन्होंने गाजीपुर जिले के सैदपुर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा पर हार गए। 1984 में भी इसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए। 1991 में पहली बार सैदपुर सीट से विधायक चुने गए। 1996 में दोबारा विधायक बनने के बाद कल्याण सिंह की सरकार में पंचायती राज और नियोजन मंत्री बनाए गए।
इसके बाद 2002 से 2007 तक के चुनाव में लगातार हार का सामना करना पड़ा। 2009 में पहली बार भदोही लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन जीत हासिल नहीं हो सकी। भाजपा ने डॉ. पांडेय को 2014 में सीट बदल कर चंदौली सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्हें 4 लाख 14 हजार 134 वोट मिले। 2015 में मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में इन्हें राज्यमंत्री बनाया गया था।
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके कलराज मिश्र ने डॉ. पांडेय को राजनीति का ककहरा सिखाया। सैदपुर के मूल निवासी डॉ. मिश्र और डा. पांडेय आसपास गांव के हैं। कलराज ही डॉ. पांडेय को राजनीति में लेकर आए। सैदपुर सीट पर अमूमन सपा का दबदबा रहा है। इक्का दुक्का बार छोड़ दिया जाए तो इस सीट पर सपा का ही कब्जा रहा है। यहां तक की मोदी लहर में भी विधानसभा सीट पर सपा का कब्जा है।