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बनारस में विचित्र विवाह: महिला दूल्हा, पुरुष दुल्हन, विवाह की रात ही तलाक

Tue, 03 Apr 2018 06:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
मस्तमौलाओं-फक्कड़ों के शहर बनारस में बीती रात गजब की शादी हुई। सैंकड़ों लोग इस पल पर मौजूद थे। इस शादी में पुरुष को दुल्हन और महिला को दूल्हा बान कर सात फेरे दिलाए गए। शादी को कुछ मिनट भी नहीं बीते थे कि दुल्हन- दूल्हा में तकरार शुरू हो गया। वहां मौजूद दोनों पक्ष के लोगों ने फट से उनका तलाक भी कर दिया।  यह जानकर आपको अचरज होगा लेकिन यही सच है। आखिर क्यों हुआ ऐसा ये जानने के लिए देखें आगे की स्लाइड्स... 


 
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बनारस की यह विचित्र शादी राजेंद्र प्रसाद घाट पर रविवार रात को हुई। मौका था काशी के विख्यात महामूर्ख मेले की स्वर्णजयंती समारोह का। नगाड़े की गड़गड़ और हर हर महादेव के उद्घोष के साथ वाराणसी के प्रसिद्ध राजेन्द्र प्रसाद घाट पर हर साल की तरह इस साल भी मूर्ख दिवस के अवसर पर महामूर्ख मेले का आयोजन हुआ। हर साल आयोजित होने वाले इस मेले की शुरुआत इसी विचित्र शादी से होती है।  गर्दभ ध्वनि से कार्यक्रम की शुरुआत होती है और गदहे की आरती भी उतारी जाती है। महामूर्ख मेले को करीब से देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। 

 
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एक अप्रैल को सभी ने अपने ढंग से मनाया। सोशल मीडिया पर हंसी-मजाक के मैसेज भेजे तो किसी ने अपनों को किसी बात पर बेवकूफ बनाकर मजा लिया। लेकिन इस खास दिवस को धर्म की नगरी काशी ने एक बार फिर से अपने अंदाज में मनाया। काशी के घाट पर महामूर्ख मेला का आयोजन पिछले 50 सालों से किया जा रहा है।

 

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मुरारी यादव ने गधे की आवाज निकाल कर इस कार्यक्रम का आगाज किया। मंच पर पहुंचे अतिथियों का स्वागत बड़े ही खास और मजाकिया अंदाज में किया गया। बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में पहुंचे दीपक मधोक का स्वागत मंच पर एसस भारती का तमगा देकर किया गया। इसके बाद कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे अन्य कवियों और विशिष्ट जनों को टॉयलेट ब्रश के साथ झुनझुना देकर उनका वेलकम किया गया।

 
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काशी के घोड़ा घाट पर महामूर्ख मेले में विचित्र विवाह के सभी साक्षी बने। शनिवार गोष्ठी की ओर से आयोजित महामूर्ख मेले के स्वर्ण जयंती समारोह में देर रात तक हंसी के हसगुल्ले छूटते रहे।  विवाह ही मानव जीवन की सबसे बड़ी मूर्खता है को ध्यान में रखते हुए ज्योतिषाचार्य डा. लक्ष्मण दास को दुल्हन और पत्नी पूनम दास को दूल्हा बनाकर बेढंगे मंत्रोच्चार से विवाह संपन्न कराया गया। 

 
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विवाह के ठीक बाद ही छुट्टा-छुट्टी की नौबत आ पड़ी। दूल्हे ने यह कहते हुए निभाने से इंकार कर दिया कि दुल्हन टकली है और उसकी मूंछे उग आती हैं। इस मामले में किसी तरह सुलह कराकर दोनों को वर्ष भर साथ रहने के लिए राजी किया गया। रविवार को राजेंद्र प्रसाद घाट पर कार्यक्रम की शुरूआत से पूर्व तीन बार गर्दभ ध्वनि से आयोजन के ईष्टदेव का आह्वान हुआ। 

 
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. दीपक मधोक ने गर्दभ राजा की आरती उतारकर महामूर्ख मेले का श्रीगणेश किया। इसके बाद हास्य कवियों की कविताओं का पाठ आरंभ हुआ। सुदामा तिवारी सांड़ बनारसी ने गंगा की सफाई पर खर्च हुए लाखों लाख..., झगड़ू भैया ने हम जोगी से कहलीं सरकार का करिहें गंगा माई...,विजेंद्र मिश्र दमदार बनारसी ने मोबाइल युग पर व्यंग्य करते हुए बीत गया भोजपत्र और लेखनी का युग...सुनाया।

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इसके बाद डंडा बनारसी ने राजनीति पर व्यंग्य करते हुए मेरा साला बहुत काला सड़क का घूर लगता है...सुनाया तो श्रोता अपने ठहाके नहीं रोक सके। मध्य प्रदेश के गुरु सक्सेना ने हाथों में हाथ मिल के हथकंडे बदल गए..., देवरिया के बादशाह प्रेमी ने इक्कीसवीं सदी का देखिए ये नजारा..., दिल्ली के विनीत पांडेय ने फूल बनकर महक जाए जिंदगी..., राजस्थान के बृजेंद्र चकोर ने रूखा सूखा छोड़ सब चिकनी चुपड़ी भाएगी...सुनाया तो पूरा घोड़ा घाट हास्य के फव्वारों से गूंज उठा।
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फक्कड़ गाजीपुरी ने लगता है अमृत जल को अब जहर बनाकर छोड़ेंगे..., डा. धर्मप्रकाश मिश्र ने दुखियारी गंगा जी बोली मैं फंस गई राम जी...,इलाहाबाद के अखिलेश द्विवेदी ने जो हैं पढ़े लिखे वो सब हैं संतरी बनें...और प्रतापगढ़ के दिनेश सिंह ने पत्नी ने पूछा जी ये विश्वासघात कैसा होता है..जो तेरे बाप ने किया बस वैसा ही होता है सुनाकर खूब हंसी ठिठोली की। पूरा घाट हर-हर महादेव के जयघोष और लोगों के ठहाकों से रात भर गूंजता रहा। 
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