बॉलीवुड का ग्लैमरस संसार कवि हृदय को समीर के नाम से जानता है तो अपना बनारस इन्हें शीतला प्रसाद पांडेय के नाम से बुलाता है। बचपन की चर्चा आते ही पुरानी यादें ताजा हो गईं। खेलते-कूदते, गाते-गुनगुनाते बीता बचपन। कच्चे मकान, तालाब, पोखरे, नाले। ओल्हा-पाती, गुल्ली-डंडा, लुकाछिपी। भैंस की असवारी और पोखरे में छपाछप की वो मस्ती। पगडंडियों से होकर बाजार जाना, गेहूं पिसाना। प्राइमरी स्कूल में पढ़ते समय अक्सर कक्षा से गायब हो जाना। गांव का वह सावन, भादो, मेढ़कों की टर्र-टर्र, उन्हें सब याद है।