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LPG Cylinder Crisis: होटल, मठ और भंडारे से लेकर अन्नक्षेत्रों तक की बढ़ गईं मुश्किलें, चूल्हे पर बन रहा भोजन

Fri, 13 Mar 2026 11:46 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: गैस सिलिंडर संकट के बीच काशी की रसोई चूल्हों पर लौट गई है। यहां स्टॉक खत्म होने से होटल, मठ, भंडारे से लेकर अन्नक्षेत्रों तक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 
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LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात के बीच काशी में रसोई गैस की किल्लत गंभीर हो गई है। सहालग और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों के बीच जिले में गैस सिलिंडर की कमी ने जनजीवन पर असर डालना शुरू कर दिया है। काशी में चलने वाले अन्नक्षेत्रों में गैस सिलिंडर के स्टॉक खत्म हो रहे हैं, तो वहां चूल्हे लग गए हैं। शहर के कई बड़े होटलों में भी अब चूल्हे पर भोजन बनना शुरू हो गया है। मठ-मंदिरों में चलने वाले अन्नक्षेत्र में सुबह के नाश्ते में कटौती की तैयारी कर ली गई है। एजेंसियों पर सुबह से ही लंबी लाइनें लग रही हैं। कुछ एजेंसियों में सर्वर डाउन होने की बात कही गई, तो कहीं एजेंसी बंद मिलने से लोग नाराज होकर लौट गए।
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LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
अंधरापुल स्थित होटल रीजेंसी में गैस सिलिंडर खत्म होने पर बुधवार की शाम से चूल्हे पर भोजन बनाया जाने लगा। होटल के ऑपरेशनल मैनेजर गौरव प्रजापति ने बताया कि कमर्शियल सिलिंडर की उपलब्धता पूरी तरह से ठप है। मजबूरी में होटल की छत पर दो अस्थायी मिट्टी के चूल्हे बनाए गए हैं। यहां शेफ और कारीगर मेहमानों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। छावनी क्षेत्र के रेस्टोरेंट संचालक डीके मिश्रा ने बताया कि उनके पास मात्र एक दिन का स्टॉक शेष है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो चूल्हे के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
बाजार में इंडक्शन की 15 प्रतिशत बढ़ी खरीदारी
गैस सिलिंडर क्राइसिस के बीच इंडक्शन चूल्हा और इलेक्ट्रिक कैटल्स की खरीदारी में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। इसे खरीदने के लिए शोरूम और इलेक्ट्रॉनिक की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। सिगरा, रथयात्रा, लहुराबीर, कोदई चौकी, बुलानाला समेत विभिन्न बाजारों में बृहस्पतिवार को ग्राहकों की भीड़ नजर आई। ऑनलाइन कंपनियों ने अपने रेट 10-15 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं, जिसके कारण लोगों का रुझान इस ओर बढ़ा हुआ है। स्थिति यह है कि ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर सुबह जिस इंडक्शन चूल्हे के दाम 1,000-1,500 रुपये बढ़े हुए नजर आ रहे थे, शाम होते-होते उसके स्टॉक ही समाप्त हो गए।

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LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
शादियों के मेन्यू पर चली कैंची, बुकिंग्स हो रहीं कैंसिल
शहर के कैटरर्स इस संकट से इतने डरे हुए हैं कि उन्होंने आगामी दो महीनों की लगभग 30 बड़ी बुकिंग्स कैंसिल कर दी हैं। कैटरर शरद श्रीवास्तव ने बताया कि अब कोई भी नई बुकिंग तभी ली जाएगी, जब आयोजनकर्ता स्वयं गैस सिलिंडर का प्रबंध करेंगे। वहीं, कैटरर जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि सिलिंडर बचाने के लिए अब शादियों के मेन्यू में पकवानों की संख्या आधी कर दी गई है। जहां पहले 30 व्यंजन बनते थे, वहां अब केवल 10-15 मुख्य डिशेज ही बनाई जा रही हैं, ताकि सीमित गैस में काम चल सके।
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LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
मठों, आश्रमों और अन्नक्षेत्रों में गहराया संकट
पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालक दास महाराज ने बताया कि मठ में प्रतिदिन 30-40 लोगों का भोजन बनता है। बृहस्पतिवार सुबह गैस खत्म होने और नई डिलीवरी न मिलने के कारण शाम का भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनाना पड़ा। बाबा कीनाराम आश्रम सहित अन्य छोटे मठों की भी यही स्थिति है। दुर्गाकुंड स्थित अंध विद्यालय के अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन 1200 लोगों का भोजन तैयार होता है, जिसके लिए 6 सिलिंडरों की आवश्यकता होती है। मैनेजर नीरज दुबे ने बताया कि अब उन्हें केवल तीन सिलिंडर मिल रहे हैं, जिससे व्यवस्था चरमरा गई है। चूल्हे लगा दिए गए हैं। अस्सी घाट पर चलने वाले अन्नक्षेत्र के संचालक श्रवण मिश्रा ने भी बताया कि आपूर्ति न होने के कारण अब वे भट्टी लगवाने की तैयारी कर रहे हैं। सामने घाट स्थित अपना घर आश्रम में 640 निराश्रित रहते हैं, वहां के संचालक डॉ. के. निरंजन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर आपातकालीन आपूर्ति की गुहार लगाई है। बताया कि उनके यहां प्रतिदिन 4-5 सिलिंडर की खपत होती है। बृहस्पतिवार को अचानक से सिलिंडर खत्म हो गया। एजेंसी पर नहीं मिली तो चूल्हे की व्यवस्था करनी पड़ी।
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एजेंसियों पर ताला और सर्वर की मार
नदेसर स्थित वाराणसी गैस एजेंसी के बाहर बृहस्पतिवार को उपभोक्ता सुबह से पासबुक लेकर खड़े रहे, लेकिन ऑफिस पर ताला लटका रहा। कर्मचारियों की अनुपस्थिति और जानकारी के अभाव में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। वहीं, मिर्जामुराद के बेनीपुर गैस एजेंसी पर पहुंचे। उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि 10 दिन पूर्व ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद कोई मैसेज नहीं आया। एजेंसी प्रबंधन ने सर्वर डाउन होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। चौबेपुर की साईं गैस एजेंसी पर केवाईसी कराने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। एजेंसी के अनुसार, केवाईसी के बिना डिलीवरी संभव नहीं है, लेकिन बृहस्पतिवार को वहां भी गैस नहीं पहुंची। चिरईगांव की भारत सुमन गैस एजेंसी का हाल भी बुरा रहा, जहां शिक्षक और ग्रामीण तीन दिन से शटर खुलने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे गोबर के उपलों (गोईठा) और लकड़ी के सहारे रहने को मजबूर हैं।
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LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
कुछ एजेंसियों का दावा, हमारे पास स्टॉक मौजूद
गंगा गैस एजेंसी (गंगापुर) के सत्य प्रकाश ने दावा किया कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन बुकिंग की संख्या 300 से बढ़कर 600 पहुंच गई है। कछवा रोड क्षेत्र के छतेरी स्थित इंडियन ग्रामीण गैस एजेंसी पर भीड़ तो नहीं दिखी, लेकिन वहां भी बुकिंग के 3-4 दिन बाद ही डिलीवरी मिल पा रही है। एजेंसी प्रबंधक संजय त्रिपाठी ने बताया कि वे लोगों को ओटीपी आधारित सिस्टम के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

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LPG Gas Crisis - फोटो : अमर उजाला
अधिकारी बोले
कई गैस एजेंसियां बिना बुकिंग के ही लोगों को गैस दे देती थीं। अब नियम बदलने से उन्हें केवाईसी के लिए बुलाया जा रहा है। इसके कारण सर्वर पर समस्या हो रही है और आम लोगों को भी परेशानी हो रही है। उपभोक्ताओं को गैस से संबंधित किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए प्रशासन का पूरा ध्यान है। -केबी सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी
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ये भी जानें
  • वाराणसी में कुल एलपीजी गैस उपभोक्ता: 10,65,634
  • कुल कमर्शियल गैस उपभोक्ता: 5,255
  • उद्योगों में पीएनजी उपभोक्ता: 65,000
  • एलपीजी गैस एजेंसियां: 39
  • प्रतिदिन घरेलू गैस सिलिंडर की डिलीवरी: 20,000 से 22,000
  • कमर्शियल एलपीजी गैस की डिलीवरी: 400 से 450
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