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मां गौरी का गौना कराने ससुराल पहुंचे महादेव, इस बार अलग पहनावे में भक्तों के साथ खेलेंगे होली

Sun, 17 Mar 2019 04:10 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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होली का त्योहार करीब है और काशी की होली की तो बात ही निराली है। होली से पांच दिन पहले पड़ने वाली रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा को विदा कराकर ले जाएंगे। महादेव अपने गणों के साथ शुक्रवार को ससुराल पहुंच गए। देखें आगे की स्लाइड्स में...
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ससुराल पहुंचे महादेव - फोटो : अमर उजाला
पालकी पर सवार होकर जब बाबा पहुंचे तो वहां उनका पूरे रस्म के साथ अगवानी और स्वागत किया गया। फिर बाबा सिंहासन पर माता गौरा और गणेश भगवान के साथ विराजमान हुए। बाबा और उनके भक्तों का स्वागत भी मेवा मिठाई खिलाकर किया गया। बाबा दरबार में रंगभरी एकादशी की पालकी यात्रा को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। गौना से पूर्व माता पार्वती के साथ भेजे जाने वाले सामानों को भी तैयार कर दिया गया है। परंपरानुसार शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ गौरा की विदाई कराने ससुराल पहुंच गए। वहीं, शनिवार को दिन में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के चल रजत प्रतिमा का दर्शन पूजन किया गया और मंगल गीत गाए गए। 
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मंगल गीत गाते भक्त - फोटो : अमर उजाला
राजस्थानी टोपी में महादेव खेलेंगे होली

रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ इस बार अलग पहनावे में दिखेंगे। बाबा के लिए राजस्थानी टोपी के साथ ही गुजराती खादी का वस्त्र बनवाया गया है, जिसे पहनकर वे माता गौरा का गौना करवाने आए है। गौने में माता पार्वती केसरिया रंग की बनारसी साड़ी पहनी हुईं है। इस दौरान बाबा विश्वनाथ भक्तों संग होली भी खेलेंगे। होली खेलने के लिए मथुरा से अबीर गुलाल मंगाया गया है। विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर 354 वर्षों से लगातार रंगभरी एकादशी के दिन पालकी में विराजमान बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती और गणेश की प्रतिमाओं के राजसी स्वरूप का दर्शन होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों के साथ होली खेलते हैं। रंगभरी एकादशी से काशी में होली खेलने की परंपरा है।

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पार्वती के साथ भेजे जाने वाले सामान - फोटो : अमर उजाला
रविवार को रंगभरी एकादशी पर प्रतिमाओं का विशेष अनुष्ठान ब्रह्म मुहुर्त में प्रात: 3:30 से 4:30 तक स्नान व पूजन किया गया। 6:00 तक 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा अभिषेक और सुबह 6:30 से 8:30 तक मातृका पूजन किया गया। सुबह 8:30 बजे विशेष राजशी श्रृंगार हुआ और 11 बजे भोग आरती के बाद 11:30 बजे पालकी पर प्रतिमाओं को विराजमान किया गया। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिये मंहत आवास में पालकी दर्शन प्रारंभ हुआ। दोपहर 12 बजे विश्वनाथ मंदिर में भोग आरती के बाद मंहत आवास में संजीव रत्न मिश्र के संयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम शिवांजली का आयोजन किया गया, जिसमें काशी, मथुरा व अवध के कलाकारों द्वारा होली गीत व नृत्य नाटिका में भस्म की होली प्रस्तुत की। सांयकाल 5 बजे रजत पालकी यात्रा निकाली जायेगी, जो मंहत आवास से मंदिर तक जायेगी।
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रंगभरी एकादशी पर सायंकालीन सप्तऋषि आरती शाम सात बजे के स्थान पर दोपहर तीन बजे हुई और रात्रि 9:30 बजे की श्रृंगार और भोग आरती शाम पांच बजे शुरू की जाएगी। मंदिर रात 11 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहेगा।
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