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आस्था या चमत्कार! काशी के इस कुंड में नहाने पर पूरी होती है संतान की मन्नत, कल आएंगे हजारों दंपती

Fri, 14 Sep 2018 02:36 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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lolark kund - फोटो : अमर उजाला
तीर्थनगरी काशी में संतान कामना के स्नान पर्व सूर्य षष्ठी पर शनिवार को लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए आस्था का जन सैलाब उमड़ने लगा है। अस्सी के भदैनी स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर शनिवार को आस्था का मेला गुलजार होगा। काशी के लक्खा मेलों में शुमार लोलार्क षष्ठी स्नान की मान्यता है कि संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले दंपतियों की मनोकामना लोलार्केश्वर महादेव पूरी कर देते हैं। आगे की स्लाइड्स में जानें इस कुंड का महत्व...
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lolark kund - फोटो : अमर उजाला

 लोलार्क कुंड में स्नान का खास महत्व होता है। देश के अलग अलग प्रांतों से आए श्रद्धालुओं की यहां भीड़ जुटती है। वाराणसी में अस्सी स्थित भदैनी के लोलार्क कुण्ड पर हर साल सूर्य षष्ठी पर लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत के अनुसार पश्चिम बंगाल स्थित कूच विहार स्टेट के एक राजा चर्मरोग से पीड़ित और नि:संतान थे। यहां स्नान करने से न केवल उनका चर्मरोग ठीक हुआ बल्कि उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उन्होंने इस कुंड का निर्माण सोने की ईंट से कराया था।

 
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lolark kund - फोटो : अमर उजाला

आदर्श सेवा संस्कृत विद्यालय ईश्वरगंगी के प्रधानाचार्य पंडित उमाशंकर चतुर्वेदी कंचन बताते हैं कि लोलार्क कुंड को सूर्य कुंड के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद्र के शुक्ल पक्ष की षष्ठी वाले दिन कुंड से लगे कूप से पानी आता है। सूर्य की रश्मियों के पानी में पड़ने से संतान उत्पत्ति का योग बनता है।
 

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lolark kund - फोटो : अमर उजाला

इस दौरान महिलाओं के स्नान करने से वे संतान प्राप्त करती हैं। इसके अलावा संतान की रक्षा के लिए भी महिलाएं स्नान करती हैं। वहीं, संन्यासी मोक्ष के लिए स्नान करते हैं। दंपती स्नान के बाद कुंड पर ही कपड़े छोड़ देते हैं। छाया, टोना, टोटका आदि का निवारण भी होता है। एक फल त्यागने का भी विधान है।
 
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lolark kund - फोटो : अमर उजाला


15 सितंबर को लोलार्क कुंड पर स्नान की शुरुआत सूर्योदय के दो घंटे पहले हो जाएगी, जो सूर्यास्त तक चलेगी। लोलार्केश्वर महादेव मंदिर के महंत शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि सूर्योदय के दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त तक स्नान का विधान है। 14 सितंबर  की रात 12:30 बजे कुंड पर पूजन होगा। इसके बाद भोर से स्नान पर्व शुरू हो जाएगा जो सूर्यास्त तक चलेगा।

 
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lolark kund - फोटो : अमर उजाला
मान्यतानुसार संतान के लिए यहां स्नान करने वाले दंपती की मनोकामना जरूर पूरी होती है। स्नान के बाद दंपती कुंड पर ही कपड़े और जूता-चप्पल छोड़ देते हैं। कुंड में कोई न कोई एक फल भी छोड़ा जाता है। सूर्योपासना के इस महापर्व पर वे दंपती भी आते हैं जिनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। वे अपनी संतान के साथ यहां आते हैं और मुंडन कराते हैं।
 
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लोलार्क कुंड - फोटो : Self

स्नान को देखते हुए प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग और सुरक्षा के अन्य इंतजामों के साथ ही निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट तैनात कर दिए गए हैं। सड़कों की मरम्मत के साथ ही पेयजल, बिजली सहित अन्य सुविधाओं को  अंतिम रूप दिया जा रहा है। 
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