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मोदी के खिलाफ सपा ने आखिरी मिनट में बदला प्रत्याशी, शालिनी का टिकट काटने के पीछे क्या है वजह

Mon, 29 Apr 2019 06:07 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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शालिनी यादव और तेज बहादुर यादव
वाराणसी में सोमवार को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था। सपा-बसपा गठबंधन में प्रत्याशी को लेकर नामांकन के अंतिम घंटें के अंतिम मिनट में पूरा पासा ही पलट गया। सपा ने नामांकन खत्म होने के ठीक एक मिनट पहले यानी 2:59 बजे ट्वीट कर के प्रत्याशी शालिनी यादव का टिकट काटते हुए बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया। सबके मन में यही सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि सपा ने अंतिम क्षण में अपना प्रत्याशी बदल दिया। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
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लोगों का कहना है कि समाजवादी पार्टी को यह डर था कि शालिनी यादव का पर्चा जांच में खारिज ना हो जाए, इसलिए सपा ने आखिरी घंटे में तेज बहादुर यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया। इसके साथ ही शालिनी यादव को डमी प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं जबकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी ने बहुत फूंक कर बनारस में कदम रखा है। अभी तेज बहादुर और शालिनी यादव के पास अपनी दावेदारी साबित करने के लिए दो और मौके हैं। पहला यह कि दोनों में से किसी एक प्रत्याशी का पर्चा जांच के दौरान खारिज हो सकता है। वहीं, दूसरा मौका यह है कि अगर दोनों प्रत्याशी का नामांकन पत्र खारिज नहीं होता है, तो दोनों में से किसी एक को अपना नाम वापस लेना पड़ेगा। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की शालिनी यादव का टिकट काट कर सपा प्रत्याशी बने तेज बहादुर यादव चुनाव लड़ पाते हैं या नहीं।

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उधर, दूसरी तरफ लोगों में यह भी चर्चा है कि सपा किसी भी कीमत पर बनारस में अपने कदम जमाए रखना चाहती है। इसलिए शायद शालिनी यादव का टिकट काट दिया गया। सूत्रों का कहना है कि शालिनी यादव से ज्यादा समर्थन तेज बहादुर यादव के पास है। शायद इसीलिए तेज बहादुर यादव को लेकर सपा के प्रवक्ता मनोज राय धूपचंडी नामांकन स्थल पहुंचे। अगर ऐसा नहीं होता तो सपा प्रवक्ता मनोज राय धूपचंडी शालिनी यादव के नामांकन जुलूस में शामिल जरूर होते।
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बता दें कि सपा ने 22 अप्रैल को वाराणसी संसदीय सीट से शालिनी यादव को गठबंधन का उम्मीदवार घोषित किया था। कांग्रेस नेता और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति श्यामलाल यादव की पुत्र वधू शालिनी ने 2017 में कांग्रेस में शामिल हुई थीं। निकाय चुनाव में महापौर प्रत्याशी के तौर पर वह दूसरे नंबर पर रही थीं। इसके बाद शालिनी यादव का कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। शालिनी ने कांग्रेस का साथ छोड़ कर पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ग्रहण की थी।
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उधर, खराब खाने की शिकायत कर चर्चा में आए बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेजबहादुर यादव ने वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान काफी पहले ही कर दिया था। प्रेस कांफ्रेंस कर के तेजबहादुर यादव ने बताया था कि उन्हें कई पार्टी समर्थन कर रही हैं। जिसके बाद भी 24 अप्रैल को तेज बहादुर यादव ने निर्दलीय नामांकन भरा था। वहीं, नामांकन के आखिरी दिन तेजबहादुर को लेकर राजनीति का पूरा समीकरण ही उल्टा हो गया है। तेजबहादुर यादव ने बताया था कि उनके समर्थन में ढाई हजार जवान हैं, हर जवान घर-घर जा कर वोट मांग रहा है।
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