फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चारों भाइयों का हुआ मिलन, दर्शकों के भर आए नयन, 477 साल की परंपरा के साक्षी बने काशीवासी

Tue, 27 Oct 2020 09:59 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
1 of 5
चारों भाइयों के मिलन के गवाह बने काशीवासी - फोटो : अमर उजाला
भरत जी पृथ्वी पर पड़े हैं। उठाए नहीं उठ रहे हैं। भगवान राम ने उन्हें जबरदस्ती उठाकर हृदय से लगा लिया। उनके सांवले शरीर के रोम-रोम खड़े हो गए। नवीन कमल के समान नयनों में प्रेम के आंसुओं की धार बह चली। श्री चित्रकूट रामलीला समिति के अयोध्या भवन का नजारा मंगलवार की शाम को बदला-बदला रहा।

अयोध्या भवन के आसपास के मकानों की छतों पर श्रद्धालु टकटकी लगाए प्रभु श्रीराम की लीला का वंदन कर रहे थे। नेमियों ने प्रभु की राह में फूल बिछाए और मिलन की नयनाभिराम झांकी को आंखों में संजोने के लिए टकटकी लगा ली। 477 साल पुरानी परंपरा के साक्षी बने नेमियों की आंखें चारों भाईयों के मिलन को देखकर सजल हो उठीं।
 
विज्ञापन

2 of 5
चारों भाइयों के मिलन के गवाह बने काशीवासी - फोटो : अमर उजाला
शाम 4:40 बजे जैसे ही भगवान श्रीराम ने भरत को अपने गले से लगाया तो चारों दिशाओं में जय श्रीराम का जयघोष गूंज उठा। काशी वासियों ने प्रभु की इस लीला का साक्षी बनने का सौभाग्य हासिल किया। कोरोना संक्रमण के कारण प्रशासन की अनुमति से केवल सौ लोगों की अनुमति मिली थी।

भरत मिलाप के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या भवन के दरवाजे खोल दिए गए। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालुओं ने चारों स्वरूपों का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। स्वरूपों की आरती पं. मुकुंद उपाध्याय ने उतारी।
 
विज्ञापन

3 of 5
भरत मिलाप का मनमोहक दृश्य - फोटो : अमर उजाला
सिर्फ स्थान बदला, कायम रही परंपरा
लीला के व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि संक्रमण के कारण परंपरा नहीं टूटी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ लीला को नाटी इमली से अयोध्या भवन में स्थानांतरित किया गया है। 477 साल पुरानी परंपरा को यथावत निभाया गया। जहां पहले हजारों की भीड़ होती थी वहां महज सौ लोग ही मौजूद रहे।

 

4 of 5
भरत मिलाप का मनमोहक दृश्य - फोटो : अमर उजाला
बजरंगी लाए खबरिया, राम आए नगरिया
विश्व विख्यात नाटी इमली के भरत मिलाप में काशी राज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह पहुंचे उन्होंने सबसे पहले चित्रकूट स्थल पर भगवान श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता का दर्शन किया। काशी की जनता ने हर-हर महादेव के जयघोष से उनका स्वागत किया। इसके बाद हनुमान जी ने चित्रकूट से अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। वहां जाकर वह भरत जी को संदेश देते हैं कि भगवान राम अयोध्या की सीमा पर आ गए हैं। यह सुनते ही भरत जी हनुमान जी के साथ अयोध्या की सीमा पर आने की तैयारी शुरू कर देते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
चारों भाइयों के मिलन के गवाह बने काशीवासी - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षा के भी थे इंतजाम
भरत मिलाप लीला मंचन में हर साल की तरह भीड़ नहीं थी बावजूद इसके सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही। कोतवाली थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय और कबीरचौरा चौकी प्रभारी प्रीतम तिवारी अयोध्या भवन के मुख्य भवन पर बिना पास के किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दे रहे थे। तो वहीं गली से सड़क तक पीएसी के जवान मोर्चा संभाले हुए थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें