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PHOTOS: काशी तमिल संगमम में बनारसी बिरहा, पचरा और दादरा पर झूमे तमिल शिक्षक; कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति

Sat, 06 Dec 2025 12:58 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी तमिल संगमम में नमो घाट पर कलाकारों ने प्रस्तुति देकर तमिल और काशी के दर्शकों को मुग्ध कर दिया। बनारसी बिरहा, पचरा और दादरा पर तमिल शिक्षक जमकर झूमे। 
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : अमर उजाला
तमिल और काशी के कलाकारों ने प्रस्तुति देकर तमिल और काशी के दर्शकों को मुग्ध कर दिया। नमो घाट पर सांस्कृतिक संध्या के दौरान पहली प्रस्तुति के रूप में महेंद्र यादव और उनकी टीम ने काशी का बिरहा, पचरा और दादरा सुनाकर तमिल शिक्षकों को खूब झूमाया। 
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : अमर उजाला
देवी पचरा गीत से जिसके बोल थे- निबियां के डरिया मईया डालेंनी झूलनवा... और दादरा में धन्य धन्य मयरिया... गाकर दर्शकों को घाट बैठे ही देवी की भक्ति में थिरकने पर मजबूर कर दिया। हारमोनियम पर धीरज कुमार, कोरस पर पिंटू, सुभाष, रामचंद्र और ढोलक पर बच्चेलाल ने संगत किया।
 
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : अमर उजाला
दूसरी प्रस्तुति लेकर आए रविचंद्रन और ग्रुप ने ओलियट्टम और थप्पट्टम लोक नृत्य किया। मांडवी सिंह ने कथक नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को शिवमय भाव में पिरो दिया। शिव स्तुति से शुरू हुए कथक प्रस्तुति का समापन जय जय भवानी दुर्गे महारानी... पर हुआ। 

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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : अमर उजाला
गायन और हारमोनियम पर गौरव मिश्रा, तबला पर भोलानाथ मिश्रा व देव नारायण, सारंगी पर ओम सहाय ने साथ दिया। नंदिनी सिंह और टीम ने बनारस की कजरी पर लोक नृत्य की प्रस्तुति दी साथ में काश्वि सिंह, तानाश्वी मिश्रा, अक्षया प्रजापति, अक्षधा सिंह, श्रुति मंगलम, आराध्या मिश्रा, वर्तिका, अलंकृता ने बखूबी भाव में भाव मिलाया।
 
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : अमर उजाला
काशी में आते ही प्रकट होता है आध्यात्मिक सत्य और मिट जाता है अहंकार : पं. आचार्य
काशी तमिल संगमम 4.0 में 200 से ज्यादा शिक्षक प्रतिनिधियों ने बीएचयू में शैक्षणिक कार्यक्रम में हिस्सेदारी की। अलग-अलग विभागों में काशी और तमिलनाडु की आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराओं को समझा। हिंदी विभाग, आईयूसीटीई, आईआईटी बीएचयू और महामना आर्काइव को देखकर बीएचयू की महान परंपराओं को महसूस किया। 
 
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काशी तमिल संगमम 4.0 के कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथि - फोटो : अमर उजाला
पं. ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में एकेडमिक कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता पद्मश्री पं. राजेश्वर आचार्य ने तमिल शिक्षकों से कहा कि काशी में जो आया, फिर वह कभी पराया नहीं रहता। काशी इसलिए शाश्वत है क्योंकि यहां आने वाला अहंकार त्याग देता है। उसके अंदर आध्यात्मिक सत्य का प्रकट होने लगता है। योगी रामसूरतकुमार आश्रम से आईं अनाहीता सिधवा ने कहा कि 1959 में तमिलनाडु और उत्तर भारत के बीच एक आध्यात्मिक सेतु बना था। बलिया के योगी रामसूरतकुमार की साधना उन्हें दक्षिण भारत ले गई। लेकिन उन्हें बाबा विश्वनाथ से ही आध्यात्मिक दिशा मिली थी। 
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : अमर उजाला
जुड़वा भी एक जैसे नहीं तो संस्कृति कैसे 
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि दुनिया में कोई दो व्यक्ति एक जैसे नहीं होते। यहां तक कि जुड़वा भी नहीं। इसी तरह संस्कृतियां भी एक जैसी नहीं हो सकतीं। प्रश्न ‘समानता’ का नहीं, बल्कि ‘एकत्व’ के उत्सव का है। आईआईटी बीएचयू के प्रो. राकेश मिश्र ने कहा कि संगमम नई भाषा, दोस्ती और नई समझ का सार है। शिक्षा संकाय की डीन प्रो. अंजली बाजपेई ने कहा कि बीएचयू “ज्ञान राजधानी” के रूप में अविराम प्रगति कर रहा है। सत्र के बाद तमिलनाडु से आए शिक्षकों का समूह कमच्छा स्थित सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल और रणवीर संस्कृत विद्यालय पहुंचा। प्राचार्य आनंद जैन ने स्वागत किया।

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