काशी महाकाल एक्सप्रेस गुरुवार को केंट स्टेशन से 2.45 बजे अपने समय पर इंदौर के लिए रवाना हो गई। जो तीन ज्योतिर्लिंगों (श्रीओम्कारेश्वर, श्री महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ) के दर्शन कराएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को काशी महाकाल एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें खबर...।
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ट्रेन के एक कोच की सीट पर भगवान शिव का मिनी मंदिर बनाया गया था, जिस पर विवाद शुरू हो गया था तो आईआरटीसी ने इस पर सफाई दी थी। मंदिर को वहां से रसोईयान(पैंट्रीकार) में शिफ्ट कर दिया है। लेकिन जिस सीट पर वह मंदिर था, उस सीट पर आज भी कोई नहीं बैठा है।
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असदुद्दीन ओवैसी (फाइल फोटो)
16 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने पड़ाव से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया था। काशी महाकाल एक्सप्रेस के कोच बी5 के सीट नंबर-64 में भगवान शिव का एक मिनी मंदिर में बनाया गया था। इस मामले पर एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। ओवैसी ने इसे लेकर पीएमओ को टैग करते हुए संविधान की प्रस्तावना ट्वीट किया था।
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वहीं इस पर आईआरसीटीसी के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि सीट हमेशा के लिए रिजर्व नहीं है। बड़े और अच्छे काम की शुरुआत में पूजा-पाठ किया जाता है। इसीलिए ट्रेन में भगवान शिव का मंदिर बनाया दिया था। वैसे भी ट्रेन में रविवार को किसी यात्री की बुकिंग नहीं थी।
अब पैंट्रीकार में शिव परिवार को स्थापित किया गया है। ट्रेन में छोटा मंदिर बरकरार रहेगा और मंदिर में ट्रेन से जुड़े कर्मचारियों की देखरेख में पूजापाठ का कार्य नियमित रूप से होगा। ट्रेन के रवाना होने से पहले भी कर्मचारियों ने पूजा-पाठ किया था।