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जैसलमेर से 3.5 डिग्री गर्म रही काशी: थार के रेगिस्तान से भी ज्यादा तप रहा गंगा का मैदान, देश का 12वां गर्म शहर

Thu, 23 Apr 2026 12:24 PM IST
Aman Vishwakarma हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Heat Wave Alert in UP: यूपी की सड़कें इन दिनों तप रहीं हैं। बनारस में सूरज की तपिश ऐसी है कि प्रमुख इलाकों में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। इस बीच, अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। लू, उल्टी, दस्त और डायरिया की शिकायतें ज्यादा हैं।
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वाराणसी के रथयात्रा चाैराहे पर धूप से बचने के लिए ग्रीन शेड लगाया गया। - फोटो : संवाद
Varanasi Weather: गंगा का मैदान थार के रेगिस्तान से भी ज्यादा तप रहा है। प्रयाग और काशी का तापमान मरुस्थल वाले शहर जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर और जोधपुर से भी 3 से 4 डिग्री तक ज्यादा है। जैसलमेर के मुकाबले काशी का पारा 3.5 डिग्री ऊपर है।
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गंगा घाट पर ग्रीन शेड की छाया। - फोटो : संवाद
बुधवार को प्रयागराज का तापमान 43.7 डिग्री और वाराणसी शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक 43.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि उसी दिन बीकानेर में 41.5 डिग्री, जैसलमेर में 39.5 डिग्री, बाड़मेर में 40 डिग्री और जोधपुर में 39.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
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धूप से बचाव के लिए छाता और दुपट्टे का सहारा लेती युवतियां। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, काशी में लू की गति 26 किलोमीटर प्रति घंटे रही, जबकि जैसलमेर और जोधपुर में महज करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। हैरानी की बात इसलिए है क्योंकि दिन में रेत, मिट्टी के मुकाबले ज्यादा तेजी से गर्म होती है। रेत सूखी होती है, जबकि मैदानी मिट्टी में नमी होने के कारण सूर्य का ताप अपेक्षाकृत धीमे-धीमे अवशोषित होता है। यह स्थिति बीते चार-पांच दिनों से देखी जा रही है। बुधवार को वाराणसी देश का 12वां और प्रयागराज चौथा सबसे गर्म शहर रहा।

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वाराणसी में तपन जारी है। - फोटो : अमर उजाला
मौसम की इस उलट स्थिति को लेकर बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कभी-कभी ऐसी मौसमी परिस्थितियां बन जाती हैं। अप्रैल से लेकर जून तक राजस्थान के मरुस्थल देश के सबसे गर्म इलाके होते हैं, लेकिन इस बार पूर्वी यूपी में ऐसा देखने को मिल रहा है। प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर पर बारिश हो रही है। 
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धूप से बचने का जुगाड़। - फोटो : अमर उजाला
काशी का न्यूनतम तापमान भी जैसलमेर से 1 डिग्री ऊपर : बुधवार को वाराणसी का न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो जैसलमेर से करीब एक डिग्री अधिक रहा। काशी की हवा में नमी 15 से 30 फीसदी के बीच दर्ज की गई, जबकि जैसलमेर में यह 13 से 49 फीसदी तक रही, जिसमें ज्यादातर समय अधिक नमी रही। यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार वाराणसी में 23 से 26 अप्रैल तक लू का येलो अलर्ट है। वहीं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक जैसलमेर में 25 और 26 अप्रैल को लू चलने का पूर्वानुमान है।
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स्कूल-काॅलेज में दिखा कुछ ऐसा नजारा। - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में लू से पीड़ित पहला मरीज भर्ती
जिले में गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। इसी बीच, बुधवार को लू से पीड़ित पहले मरीज को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है, जबकि डायरिया का भी एक गंभीर मामला सामने आया है। लोहामंडी, मलदहिया निवासी गुड्डू (50) तेज बुखार की शिकायत के बाद जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लाए गए। 
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छाता लेकर जातीं युवतिंया। - फोटो : अमर उजाला
जांच में उनका तापमान 104 डिग्री पाया गया। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू कर उन्हें हीट वेव वार्ड में भर्ती कर लिया। वहीं दूसरी ओर नक्खीघाट क्षेत्र से ढाई वर्ष का मासूम कान्हा डायरिया की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरएस राम ने बताया कि अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है। 

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धूप से बचने के लिए दुपट्टे से मुंह ढक कर व टोपी लगाकर जाती छात्राएं। - फोटो : रोहित सोनकर
शहर के चौराहों और घाटों को ग्रीन शेड की छाया
राहगीरों और वाहन चालकों को चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए नगर निगम ने एक अनूठी पहल की है। शहर के प्रमुख चौराहों और गंगा घाटों पर अब हरा पर्दा (ग्रीन शेड) लगाया जा रहा है, जिससे तीखी धूप सीधे राहगीरों तक न पहुंच सके। निगम की इस मुहिम की शुरुआत रथयात्रा चौराहे से की गई है। 
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बीएचयू में गमछे का सहारा लेकर धूप से बचते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
मुख्य अभियंता आरके सिंह ने बताया कि लहुराबीर, मलदहिया (पटेल जी की मूर्ति के पास) और दशाश्वमेध जैसे प्रमुख चौराहों के साथ-साथ गंगा घाटों पर भी ग्रीन शेड लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि भीषण दोपहर में सड़कों पर निकलने वाले हर राहगीर को धूप और लू से सुरक्षा मिले। ग्रीन शेड लगाना उसी दिशा में एक प्रभावी कदम है, ताकि शहर के प्रमुख स्थलों पर पर्याप्त छाया रहे और राहगीरों को न्यूनतम असुविधा हो। 

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