सज-धज कर महिलाएं निकलीं। चांद को निहारने के लिए सोलह श्रृंगार किया। चलनी से चांद का मुखड़ा निहारने का एक अद्भुद संयोग था। मौका था करवा चौथ व्रत का। उत्सव भी था और प्यार का इजहार भी। मस्ती भी और आस्था भी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
प्यार और पूजा के ऊंचे मानकों पर स्थापित इस व्रत पर महिलाओं ने छतों के अलावा आंगन में और मंदिरों में समूहों में करवा सजाया, पूजन किया। नृत्य-संगीत के साथ पिया का दीदार करने के क्षणों में खूब प्रेम छलका। पतियों ने मन पसंद उपहार भेंट किए।
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करवा चौथ पर अचल सुहाग की कामना से सुहागिनों ने व्रत रखा। शाम को घर, आंगन में करवा सजाया गया। मिट्टी के करवा को हल्दी, चंदन, रोली, अक्षत के अलावा शुभ, स्वास्तिक की अल्पनाओं से मोहक सजाया गया। करवा सजाने के बाद महिलाओं ने समूहों में सविधि पूजा की। अखंड सुहाग की कामना की गई।
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रात 7:51 बजे चंद्रोदय होने के साथ ही महिलाओं ने चलनी की ओट से पिया के मुखड़े को निहारा। पतियों का चेहरा निहारने के बाद नृत्य-संगीत के माहौल में जमकर मस्ती की गई।
अशोक विहार कॉलोनी में महिलाओं ने सज-धज कर करवा पूजन किया। इसी तरह महमूरगंज, सिगरा और दशाश्वमेध, अस्सी में भी करवा चौथ व्रत करने वाली महिलाओं ने चंद्रदर्शन के बाद चलनी की ओट से पिया के मुखड़े का दीदार किया।