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स्वतंत्रता दिवस विशेष: जानिए वो किस्सा जब अंग्रेजी हुकूमत ने बनारसी पान को किया था बैन

Tue, 14 Aug 2018 10:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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Paan
ऐतिहासिक विरासत कुदरत के अनमोल धरोहरों के बीच सदियों से पुष्पित-पल्लवित हो रहे काशी में अंग्रेजी हुकूमत के ढेरों किस्से हैं। धर्म, कर्म में अकूत विश्वास रखने वाले काशीवासियों में स्वतंत्रता प्रेम भी उसी तरह कूट-कूटकर भरा था। एक वक्त ऐसा आया था जब अंग्रेजों ने बनारसी पान पर रोक लगी दी थी। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें....
 
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paan - फोटो : अमर उजाला


इतिहास से भी पुरातन शहर बनारस की पहचान बनारसी पान है। जो कोई भी एक बार सेवन कर ले वो बानरसी पान का दिवाना हो जाता है।  बनारस की बात हो और बनारसी पान का जिक्र न हो तो जैसे सबकुछ अधूरा सा लगता है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में लोग इसके कायल हैं। यहां आने वाले देसी-विदेशी पर्यटक पान का एक बीड़ा जरूर घुलाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एक समय ऐसा भी था, जब इस पान पर रोक लगा दी गई थी। 

 
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paan - फोटो : self

वाराणसी के चौक स्थित 130 साल पुरानी पान की दुकान रामस्वरूप चंद्र ताम्बूल के मालिक पवन चौरसिया ने बताया कि आज पूरी दुनिया में भले ही बनारसी पान प्रसिद्ध हो लेकिन एक समय ऐसा भी आया था जब अंग्रेजों ने इस पर रोक लगा दी थी। पवन ने बताया कि आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों की गतिविधियां बढ़ चुकी थीं। अंग्रेजों को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था। 

 

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paan - फोटो : अमर उजाला
उस समय रणभेरी नामक अखबार क्रांतिकारियों की विचारधारा का सबसे बड़ा समर्थक बन गया था। इसी दौरान अंग्रेजों ने पान खाने से लेकर पान की बिक्री पर पाबंदी लगा दी। उन्हें शक था कि स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भी कोई भूमिका है। पवन के मुताबिक, जब अंग्रेजों ने पान खाने पर रोक लगाई तो उस वक्त उनके पूर्वजों ने इसका तोड़ निकाल लिया था। 

 
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10 reasons you should chew paan or betel leaves
वे दोने में पान रख कर उसे रणभेरी अखबार के नीचे छिपा देते थे। इस तरह से घर-घर में पान की सप्लाई करते थे। इस तरीके के कारण अंग्रेज उन्हें पकड़ नहीं पाते थे। 
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kashi - फोटो : अमर उजाला
जिस शहर में लोग मोक्ष के लिए आते हैं, उस शहर के लोगों में स्वतंत्रता की अद्भुत चाहत अगस्त, 1942 में दिखी थी। चेत सिंह के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1781) से लेकर 1942, यहां तक कि 1945 तक बनारस में जो ललक और लहर देखने को मिली, वह देश के कई अन्य जगह के मुकाबले अधिक थी। इसी दौरान काशी से ‘मारेंगे नही पर मानेंगे भी नहीं’ गूंजा था। बनारस का आंदोलन हिंसक नहीं था पर इसको मनवाना भी आता था। धर्म, कर्म में अकूत विश्वास रखने वाले काशीवासियों में स्वतंत्रता प्रेम भी उसी तरह कूट-कूटकर भरा था। 
 
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paan - फोटो : self

बनारस में विभिन्न तरह के पान मिलते हैं जिसे लोग अपनी पसंद के अनुसार खाते हैं। हर पान की अपनी एक खासियत होती है। फिर चाहे वो पाइनेपल पान, एप्पल पान ,स्ट्राबेरी पान, नवरत्न पान, राजरत्न पान , ऑरेंज पान, चॉकलेट पान हो या फिर आइस पान। बनारसी पान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मुंह में रखते ही ये घुल जाता है। बनारसी पान इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें लगाया जाने वाला कत्था, चूना, आदि घर में ही बनाया जाता है।
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