आईआईटी बीएचयू में तीन दिवसीय वार्षिक टेक्नो मैनेजमेंट फेस्टिवल ‘टेक्नेक्स 2018’ का दूसरे दिन शनिवार को औपचारिक उदघाटन हुआ। मुख्य अतिथि नोबल पुरस्कार विजेता आडा योनाथ ने निदेशक प्रो. राजीव संगल आदि की मौजूदगी में उद्घाटन के बाद भावी इंजीनियरों को रिसर्च, इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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उधर, राजपुताना और स्वतंत्रता भवन में चली प्रतियोगिताओं के अलावा बीएचयू, दिल्ली, गोरखपुर, बंगलौर, मुंबई आदि जगहों से आए प्रतिभागियों ने अपने प्रोजेक्ट का प्रदर्शन कर कौशल विकास की झलक प्रदर्शित की। यह पहला अवसर है जब आईआईटी में टेक्नेक्स और इंस्टीट्यूट डे साथ-साथ मनाया जा रहा है। इसको लेकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग, बायोकेमिकल आदि विभागों में छात्र-छात्राओं ने अपने द्वारा बनाए मॉडलों को लगाया। स्वतंत्रता भवन में कहीं ड्रोन उड़ा तो कही हाइड्रोलिक सिस्टम के बारे में छात्र जानकारी दे रहे थे।
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मुख्य अतिथि आडा योनाथ ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से कंप्यूटर, विज्ञान क्षेत्र में नए खोज, उसकी जरूर के साथ ही अपने उपलब्धियों को गिनाया। निदेशक ने टेक्नेक्स और संस्थान दिवस के आयोजन के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान छात्र अधिष्ठाता प्रो. बीएन राय, संस्थान दिवस के संयोजक प्रो. आरएस सिंह, ‘टेक्नेक्स 2018’ के संयोजक यश शर्मा, रिलायंस इंड्रस्ट्रीज से विनायक मराठे, जनरल सेकेट्री एसएनटीसी कर्तव्य जैन आदि मौजूद रहे।
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आईआईटी में मनाए जा रहे इंस्टीट्यूट डे पर नयी सोच और नवोन्मेष को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग स्तर पर लगी प्रदर्शनी में 400 मॉडल लगाए गए हैं। विशेषज्ञों की ओर से इसके लिए 100 श्रेष्ठ मॉडलों का चयन किया जिनको दूसरे दिन प्रदर्शनी में भाग लेने का मौका मिला। आयोजन को सफल बनाने में ऋषिकेश कृष्णा, दिव्यांशु गुप्ता, हर्षित चौधरी आदि की अहम भूमिका है। आईआईटी जिमखाना पर चलने एयर शो के साथ ही साइकिल पर स्टंट शो और राजपुताना ग्राउंड पर कई बाधाओं को पार कर आगे बढ़ते रेसिंग कार को देखने वालों की भीड़ उमड़ी रही।
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राजपुताना ग्राउंड पर बीआईटी छात्र ऋषभ कुमार, राजीव चौधरी, अविनाश राय, नितेश श्रीवास्तव ने खुद की बनाई रेसिंग कार का प्रदर्शन किया। उधर मैकेनिकल इंजीनियरिंग में लगाए गए मैराथन एशिया कार को देखने भीड़ लगी रही। छात्रों के मुताबिक इसे एक यूनिट की बिजली खर्च कर 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ले जाया जा सकता है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्रों की ओर से लोहे के बेकार पड़े सामानों के प्रयोग से बनाई गई आरा मशीन के साथ ही सेंटी फ्यूरल पंप आकर्षण का केंद्र रही।
अमित, आयुष, प्रभात, विक्रांत ने बताया कि आरामशीन को बनाने में दो महीने का समय लगा इससे लकड़ी पर किसी तरह की डिजाइन बनाई जा सकती है। 22 हजार आरपीएम वाले इस मशीन में ज्यादात्तर सामान बेकार लगाए गए हैं। रॉकेट, स्मार्ट मिरर, सालिड वेस्ट कलेक्शन, आटोमेटिक बॉल मशीन, ड्रोन आदि सबकी नजर रही।