वाराणसी के मैदान पर भगवा कुर्ता-धोती पहने बटुकों को क्रिकेट खेलता देख कौतूहल बढ़ता गया। मौका था संस्कृत क्रिकेट प्रतियोगिता का, जिसमें बटुक कभी बल्ले से छक्का लगते तो कभी धोती के साथ रन लेने भागते।
तिलक और शिखाधारी बटुक जब धोती-कुर्ता में क्रिकेट के मैदान पर उतरे तो हर कोई बस देखता ही रह गया। संस्कृत में चतुरधाव्नांका (चौका) तथा षड्धाव्नांका (छक्का), बहिर्भूत: (आउट), दंड पतनात बहिर्भूत (बोल्ड) से मैदान गूंज रहा था। हर शॉट पर संस्कृत में कमेंट्री और उत्साह बढ़ाने के लिए हर-हर महादेव का जयघोष। यह नजारा था शनिवार को सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्टेडियम में शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 79वें स्थापना दिवस पर आयोजित संस्कृत क्रिकेट मैच का। संस्कृत के छात्रों ने मंगलाचरण व वेद मंत्रों का पाठ कर मैदान पर प्रवेश किया।
शुभारंभ विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बटुकों से संस्कृत में परिचय और क्रिकेट खेल कर किया। प्रतियोगिता में शास्त्रार्थ महाविद्यालय, इंटरनेशनल चंद्रमौलि चैरिटेबल संस्कृत संस्थान, चल्ला शास्त्री वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय व श्री भगवान विष्णु स्वामी सतुआ बाबा संस्कृत विद्यालय की टीमें शामिल थीं। चौके-छक्के, कवर ड्राइव, पुल शॉट मारने के दौरान खिलाड़ियों का लहराता भगवा चोला लोगों को बेहद आकर्षक लग रहा था।
डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि छात्रों को केवल वेदपाठी ही नहीं समझना चाहिए अपितु उन्हें हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा निखारने के लिए एक अवसर प्रदान करना चाहिए। संस्कृत में कमेंट्री डॉ. शेषनारायण मिश्र व विकास दीक्षित ने किया।
प्राचार्य पवन कुमार शुक्ल ने कहा कि यह अनोखा आयोजन सिर्फ काशी में होता है, जिसकी प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं। अंपायर की भूमिका में पूर्व खिलाड़ी धीरज मिश्रा व अनुज निशी तिवारी तथा रेफरी के रूप में डॉ. अशोक पांडेय शामिल थे।
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जीत के बाद का जश्न, हर हर महादेव से गूंजा मैदान
- फोटो : अमर उजाला
फाइनल मुकाबले में चंद्रमौलि की टीम ने 86 रन बनाए जबकि मेजबान शास्त्रार्थ की टीम 80 रनों पर ऑलआउट हो गई। इस प्रकार 6 रनों से चंद्रमौलि की टीम फाइनल जीत गई। इंद्रजीत ने 47 रनों की पारी खेली। पहले मैच में चंद्रमौलि संस्थान ने आठ ओवर में 87 रन बनाए जबकि विपक्षी टीम चल्ला शास्त्री 61 रन बनाकर ऑलआउट हो गई।
चंद्रमौलि की टीम 26 रनों से विजयी हुई। दूसरे मैच में सतुआ बाबा की टीम ने सात विकेट गंवाकर 94 रन बनाए। बदले में शास्त्रार्थ के इंद्रजीत ने 62 रनों का योगदान दिया। बाकी पांच और खिलाड़ियों ने 33 रन जोड़े। जिसकी बदौलत शास्त्रार्थ महाविद्यालय की टीम फाइनल में पहुंची थी।