सुहागिन महिलाएं अखंड सुहाग के लिए निराहार व्रत करेंगी, तो कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए। मौका होगा हरितालिका तीज पर भगवान-शिव और पार्वती की निराहार रहकर आराधना करने का। आगे की स्लाइड में जाने व्रत की विधियां और शुभ मुहूर्त...
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पार्वती और शिव
- फोटो : google
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया 24 अगस्त को हरि तालिका तीज व्रत की घर-घर तैयारी शुरू हो गई है। पौराणिक मान्यता के अनुसार हरितालिका तीज के ही दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने का संकल्प लिया था।
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शिव पार्वती
सुहाग कामना के इस व्रत को गौरी तृतीया के रूप में भी जाना जाता है। बुधवार की रात 9:03 बजे ही तृतीया लग जाएगी। उदया तिथि न मिलने की वजह से व्रत गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार को रात 8:27 बजे तक तृतीया रहेगी।
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teej 2017
हरितालिका तीज के दिन महिलाएं 24 अगस्त की भोर में मौन होकर स्नान करने के साथ ही व्रत धारण करेंगी। इसके बाद मिट्टी, चांदी या सोने की शिव-पार्वती और प्रथमेश की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना कर सविधि पूजा करेंगी।
पंचोपचार, दशोपचार और षोडशोपचार पूजन का विधान है। शिव-पार्वती की प्रतिमाओं पर नैवेद्य के रूप में सूखा मेवा, ऋतुफल, मिठाई अर्पित की जाएगी। व्रती महिलाएं रात को जागरण करेंगी। इस दौरान भजनों के साथ ही शिव-पार्वती की महिमा का बखान होगा।