पालकी को कंधा देते मां के भक्त।
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आगे महिलाएं मां के जयकारा लगाते हुए कलश लेकर चल रही थीं। पालकी लिए श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते चल रहे थे। मार्ग में महिलाएं मां का पूजन कर आरती उतारकर सुख-समृद्धि की कामना कर रही थीं। शोभायात्रा बुलानाला, ठठेरी, आसभैरव, ठठेरी बाजार, चौखंभा, राज मंदिर, ब्रह्माघाट, दुग्धविनायक होते हुए दोपहर में तीन बजे मंगला गौरी मंदिर पहुंची, जहां मां की आरती उतारी गई। इसके साथ ही मंदिर में दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ।