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काशी में पूजी गईं मां महाकाली: 50 पंडालों में महानिशीथ काल में गूंजे मंत्र, कुष्मांड की बलि; देखें तस्वीरें

Tue, 21 Oct 2025 02:14 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Kali Puja 2025: वाराणसी में दीपावली के अवसर पर काली पूजा भी की गई। शुभ मुहूर्त की शुरुआत होते ही पंडालों में मूर्तियों के चेहरे से कपड़े हटाए गए तो भक्त मां के जयकारे लगाने लगे। देर रात तक पूजन-अर्चन के साथ आतिशबाजी भी होती रही।
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काशी में पूजी गईं मां महाकाली। - फोटो : अमर उजाला
Varanasi News: दीपावली पर मां महाकाली का पूजन हुआ। शहर में 50 से अधिक पूजा पंडालों में मां काली तंत्रोक्त विधि से महानिशीथ काल में आह्वान किया गया। दोपहर के बाद से ही पूजा पंडालों में माता की पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं। देर शाम श्रद्धालु भी पूजा पंडालों में माता के दर्शन के लिए पहुंचते रहे।
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मां अन्नपूर्णा का पूजन करते मंदिर के महंत। - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को पूजा पंडालों में महाकाली की पूजा आरंभ हो गई। देवनाथपुरा स्थित नवसंघ के पंडाल में महानिशीथ काल में मां काली का पूजन आरंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चक्षुदान व प्राण प्रतिष्ठा हुई। कलश स्थापना, पंचदेव पूजन के साथ ही माता की आराधना आरंभ हो गई। माता को कुष्मांड की बलि अर्पित की गई। शाम को पंडालों में दीपदान किया गया। 
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गंगा आरती पर जले असंख्य दीप। - फोटो : अमर उजाला
पांडेयघाट स्थित प्राचीन मां काली व मां तारा, मां दुर्गा का विशेष पूजन व शृंगार किया गया। रात में माता को फूल अर्पित करने के बाद प्रसाद वितरण किया गया। पूजन व आरती बंगाल से आए पुरोहितों ने संपन्न कराया। सोनारपुरा स्थित वाणी संघ, दारानगर, दशाश्वमेध, बंगाली टोला के पंडालों में काली मां की पूजा हुई। देवनाथपुरा स्थित मां शवशिवा काली मंदिर, नारद घाट, नवापुरा, श्यामा नगर काॅलोनी, बरेका और लंका में मां काली का पूजन किया गया।

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ऊंची-ऊंची इमारतों पर सजाई गई झालर। - फोटो : अमर उजाला
1100 घी के दीपक जलाकर हुआ अनुष्ठान : युवा अग्रवाल सम्मेलन की ओर से श्री अग्रसेन कन्या इंटर कॉलेज में चल रही पांच दिवसीय महालक्ष्मी पूजनोत्सव के दूसरे दिन अर्धरात्रि में दीपावली पूजन एवं अनुष्ठान किया गया। 
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काशी नगरी में दिवाली की रही धूम। - फोटो : अमर उजाला
प्राण प्रतिष्ठित पंच प्रतिमाओं महाबली हनुमान, माता सरस्वती, महालक्ष्मी, माता काली और भगवान गणेश का पूजन हुआ। सोमवार को पुष्प शृंगार के बाद 1100 घी के दीये जलाकर गणेश-लक्ष्मी की विशेष पूजा पं. विकास महाराज के सानिध्य में हुई। 
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झालरों की लाइट से जगमगाया शहर। - फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम में अक्षय, अमोघ, मोही, देवांश, भव्या, रुद्रांश, उन्नति, गौरांग, माधव, पुष्पम, नीरज, शिवांश, श्रीयांश, प्रियांश ने मिलकर घी के दीपक जलाए और आतिशबाजी के साथ दीपावली मनाई। अध्यक्ष हिमांशु अग्रवाल, सलिल अग्रवाल, सुयश अग्रवाल, अजय कृष्ण अग्रवाल, रवीश अग्रवाल, हर्षित अग्रवाल मौजूद रहे। 
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दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ में जले दीप। - फोटो : अमर उजाला
दीपों से नहाया मणि मंदिर, बटुकों ने की आतिशबाजी
दीपावली पर दुर्गाकुंड स्थित मणि मंदिर में संत समाज, बटुकों और श्रद्धालुओं ने दीपदान किया। सनातन धर्म के प्रतीक चिह्न और सहस्त्र मालिका दीप जब एक साथ प्रज्ज्वलित हुई तो समूचा परिसर दीयों की रोशनी से नहा उठा।

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गंगा किनारे भी हुई आतिशबाजी, जले दीप। - फोटो : अमर उजाला
पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी के सानिध्य में बटुकों ने आतिशबाजी कर उत्सव मनाया। सबसे पहले धर्मसंघ महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने करपात्र बाग में गोधूलि बेला में कलश दीप प्रज्ज्वलित कर ज्योति पर्व का शुभारंभ किया। बटुकों ने पंच सहस्त्र मालिका, सनातन धर्म के प्रतीक चिन्ह जैसे स्वास्तिक, ओमकार आदि के साथ धनं धान्यम पशुं बहुपुत्रलाभम मंत्र को दीपों से सजाया। 

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मठ-मंदिरों में जलाए गए दीप। - फोटो : अमर उजाला
मंदिर में स्थापित श्रीराम दरबार, मां अन्नपूर्णा, द्वादश ज्योतिर्लिंग सहित समस्त देव विग्रहों का विशिष्ट शृंगार किया गया। बुधवार को मंदिर में अन्नकूट की झांकी सजाई जाएगी जिसमें घर की बनी रसोई ठाकुर जी को अर्पित किया जाएगा।

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सूप-दउरा की हुई बिक्री। - फोटो : अमर उजाला
दीपावली की शाम सजा भेला का मेला, सूप-दउरा की सजीं दुकानें 
दीपावली की भोर में भेला का मेला सजा। दमे के इलाज के लिए पूर्वांचल के जिलों से लोग शाम से ही पहुंचने लगे थे। मंडुवाडीह थाने के बगल में स्थित गणेश मंदिर पोखरे पर मेले की तैयारियां सुबह से ही शुरू हो गई थीं। मंडुआडीह क्षेत्र में लगने वाला वर्षों पुराना इस मेले का दमा रोगी साल भर इंतजार करते हैं। 

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जमकर हुई आतिशबाजी। - फोटो : अमर उजाला
यह मेला दीपावली की शाम से शुरू होकर अगले दिन सूर्योदय तक चलता है। भेला के फल से बनने वाली दमा की दवा के लिए दूर-दूर से दमा रोगी मेले में आते हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि कितना भी पुराना दमा का रोग हो वह यहां मिलने वाली दवा से सही हो जाता है। 

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महिलाओं और युवतियों ने की पूजा। - फोटो : अमर उजाला
मेले में बांस के बने उत्पाद सूप, दउरा, लकड़ी की खाट, झाड़ू, चलनी सहित कई घरेलू सामान की दुकानें सजीं थीं। इसे खरीदने के लिए भी लोग दूर-दूर से आते हैं। मेले में मिर्जापुर, चंदौली व अन्य जिलों से दवा पिलाने व पूर्वांचल के कई जिलों से दमा से पीड़ित लोग दवा पीने आते हैं।

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कुम्हारों में भी खुशी। - फोटो : अमर उजाला
पीढि़यों से निभा रहे हैं परंपरा : मेले में कई पीढ़ियों से भेला का रस बेचने वाले बबलू सोनकर बताते हैं कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस परंपरा को निभा रही हैं। भेले के रस का सेवन विशेष विधि से किया जाता है। 

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गंगा आरती में हजारों भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
100 दिन के बाद दीपावली पर अपने स्थान पर हुई आरती
दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्वप्रसिद्ध मां गंगा आरती 100 दिनों के लंबे अंतराल के बाद यथास्थान शुरू हो गई। जलस्तर कम होने के बाद जब मां गंगा की आरती के दर्शन को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे श्रद्धालु इस दौरान भक्तभाव में डूबे नजर आए। 

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मदिरों और पेड़ो के नीचे भी जलाए गए दीप। - फोटो : अमर उजाला
दशाश्वमेध घाट के किनारे अब प्रतिदिन मोक्षदायिनी मां गंगा की आरती के दर्शन मिलेगी। 100 दिनों बाद सोमवार को दशाश्वमेध घाट पर घंटे ,घड़ियाल और शंखनाद हुआ। घंटी, डमरू की आवाज और मां गंगा के जयकारे के बीच मां गंगा की भव्य आरती हुई और भक्तों ने इस आरती को देख मोक्ष की कामना की। पूरी दुनिया से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा की आरती दर्शन को आते हैं। 
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आतिशबाजी करते युवा। - फोटो : अमर उजाला
बीते दिनों गंगा का जलस्तर बढ़ने से गंगा आरती का स्थान परिवर्तित हो गया था। 11 जुलाई से बाढ़ के कारण आरती छत पर संपन्न कराई जा रही थी लेकिन आज से यथास्थान गंगा की भव्य आरती की शुरूआत हुई।
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